त्वं मुग्धाक्षि विनैव कञ्चुलिकया धत्से मनोहारिणीं
लक्ष्मीमित्यभिधायिनि प्रियतमे तद्वीटिकां संस्पृशि ।
शय्योपान्तनिविष्टसस्मितमुखीनेत्रोत्सवानन्दितो
निर्यातः शनकैरलीकवचनोपन्यासम् आलीजनः ॥
त्वं मुग्धाक्षि विनैव कञ्चुलिकया धत्से मनोहारिणीं
लक्ष्मीमित्यभिधायिनि प्रियतमे तद्वीटिकां संस्पृशि ।
शय्योपान्तनिविष्टसस्मितमुखीनेत्रोत्सवानन्दितो
निर्यातः शनकैरलीकवचनोपन्यासम् आलीजनः ॥
लक्ष्मीमित्यभिधायिनि प्रियतमे तद्वीटिकां संस्पृशि ।
शय्योपान्तनिविष्टसस्मितमुखीनेत्रोत्सवानन्दितो
निर्यातः शनकैरलीकवचनोपन्यासम् आलीजनः ॥
अन्वयः
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'मुग्धाक्षि, त्वं कञ्चुलिकया विना एव मनोहारिणीं लक्ष्मीं धत्से' इति प्रियतमे अभिधायिनि (सति) तद्-वीटिकां संस्पृशि (सति), शय्या-उपान्त-निविष्ट-सस्मित-मुखी-नेत्र-उत्सव-आनन्दितः आली-जनः अलीक-वचन-उपन्यासं शनकैः निर्यातः ।
Summary
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When her lover touched her betel-leaf pouch, saying, "O beautiful-eyed one, you possess a captivating charm even without a blouse," her maids, delighted by the joyful festival in her smiling eyes as she sat on the edge of the bed, slowly departed on the pretext of some false errand.
पदच्छेदः
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| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| मुग्धाक्षि | मुग्धाक्षि (८.१) | O beautiful-eyed one |
| विना | विना | without |
| एव | एव | even |
| कञ्चुलिकया | कञ्चुलिका (३.१) | a blouse |
| धत्से | धत्से (√धा कर्तरि लट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | possess |
| मनोहारिणीम् | मनोहारिणी (२.१) | a captivating |
| लक्ष्मीम् | लक्ष्मी (२.१) | charm |
| इति | इति | thus |
| अभिधायिनि | अभिधायिन् (अभि√धा+णिनि, ७.१) | was saying |
| प्रियतमे | प्रियतम (७.१) | when the beloved |
| तत् | तद् | her |
| वीटिकाम् | वीटिका (२.१) | betel-leaf pouch |
| संस्पृशि | संस्पृश् (सम्√स्पृश्, ७.१) | was touching |
| शय्या | शय्या | bed |
| उपान्त | उपान्त | edge |
| निविष्ट | निविष्ट (नि√विश्+क्त) | seated on |
| सस्मित | सस्मित | smiling |
| मुखी | मुखी | face |
| नेत्र | नेत्र | eyes |
| उत्सव | उत्सव | festival |
| आनन्दितः | आनन्दित (आ√नन्द्+क्त, १.१) | delighted by |
| निर्यातः | निर्गत (निर्√या+क्त, १.१) | departed |
| शनकैः | शनकैस् | slowly |
| अलीक | अलीक | false |
| वचन | वचन | errand |
| उपन्यासम् | उपन्यास (२.१) | on the pretext of a |
| आली | आली | maids |
| जनः | जन (१.१) | the group of |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्वं | मु | ग्धा | क्षि | वि | नै | व | क | ञ्चु | लि | क | या | ध | त्से | म | नो | हा | रि | णीं |
| ल | क्ष्मी | मि | त्य | भि | धा | यि | नि | प्रि | य | त | मे | त | द्वी | टि | कां | सं | स्पृ | शि |
| श | य्यो | पा | न्त | नि | वि | ष्ट | स | स्मि | त | मु | खी | ने | त्रो | त्स | वा | न | न्दि | तो |
| नि | र्या | तः | श | न | कै | र | ली | क | व | च | नो | प | न्या | स | मा | ली | ज | नः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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