पश्यामो मयि किं प्रपद्यत इति स्थैर्यं मयालम्बितं
किं मामालपतीत्ययं खलु शठः कोपस्तयाप्याश्रितः ।
इत्यन्योन्यविलक्षदृष्टिचतुरे तस्मिन्नवस्थान्तरे
सव्याजं हसितं मया धृतिहरो बाष्पस्तु मुक्तस्तया ॥
पश्यामो मयि किं प्रपद्यत इति स्थैर्यं मयालम्बितं
किं मामालपतीत्ययं खलु शठः कोपस्तयाप्याश्रितः ।
इत्यन्योन्यविलक्षदृष्टिचतुरे तस्मिन्नवस्थान्तरे
सव्याजं हसितं मया धृतिहरो बाष्पस्तु मुक्तस्तया ॥
किं मामालपतीत्ययं खलु शठः कोपस्तयाप्याश्रितः ।
इत्यन्योन्यविलक्षदृष्टिचतुरे तस्मिन्नवस्थान्तरे
सव्याजं हसितं मया धृतिहरो बाष्पस्तु मुक्तस्तया ॥
अन्वयः
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'मयि किं प्रपद्यते इति' मया स्थैर्यम् आलम्बितम् । 'किं माम् न आलपति इति' अयं खलु शठः कोपः तया अपि आश्रितः । इति अन्योन्य-विलक्ष-दृष्टि-चतुरे तस्मिन् अवस्थान्तरे, मया स-व्याजं हसितं, तया तु धृति-हरः बाष्पः मुक्तः ।
Summary
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"I remained firm to see what he would do. He, the rogue, also adopted anger, thinking, 'Why doesn't she speak to me?'" In this standoff, with both looking at each other with estranged glances, I smiled artfully, but she released a torrent of tears that broke my resolve.
पदच्छेदः
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| पश्यामः | पश्यामः (√दृश् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. बहु.) | let me see |
| मयि | अस्मद् (७.१) | towards me |
| किम् | किम् (२.१) | what |
| प्रपद्यते | प्रपद्यते (प्र√पद् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | he does |
| इति | इति | thinking this |
| स्थैर्यम् | स्थैर्य (२.१) | firmness |
| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
| आलम्बितम् | आलम्बित (आ√लम्ब्+क्त, १.१) | was maintained |
| किम् | किम् | why |
| माम् | अस्मद् (२.१) | to me |
| आलपति | आलपति (आ√लप् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | does she speak |
| इति | इति | thinking this |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| खलु | खलु | indeed |
| शठः | शठ (१.१) | rogue |
| कोपः | कोप (१.१) | anger |
| तया | तद् (३.१) | by her |
| अपि | अपि | also |
| आश्रितः | आश्रित (आ√श्रि+क्त, १.१) | was resorted to |
| इति | इति | thus |
| अन्योन्य | अन्योन्य | each other |
| विलक्ष | विलक्ष | estranged |
| दृष्टि | दृष्टि | glances |
| चतुरे | चतुर (७.१) | in the clever exchange of |
| तस्मिन् | तद् (७.१) | in that |
| अवस्थान्तरे | अवस्थान्तर (७.१) | situation |
| स | स | with |
| व्याजम् | व्याज | artfully |
| हसितम् | हसित (√हस्+क्त, १.१) | it was smiled |
| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
| धृति | धृति | resolve |
| हरः | हर (१.१) | destroying |
| बाष्पः | बाष्प (१.१) | tears |
| तु | तु | but |
| मुक्तः | मुक्त (√मुच्+क्त, १.१) | were released |
| तया | तद् (३.१) | by her |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | श्या | मो | म | यि | किं | प्र | प | द्य | त | इ | ति | स्थै | र्यं | म | या | ल | म्बि | तं |
| किं | मा | मा | ल | प | ती | त्य | यं | ख | लु | श | ठः | को | प | स्त | या | प्या | श्रि | तः |
| इ | त्य | न्यो | न्य | वि | ल | क्ष | दृ | ष्टि | च | तु | रे | त | स्मि | न्न | व | स्था | न्त | रे |
| स | व्या | जं | ह | सि | तं | म | या | धृ | ति | ह | रो | बा | ष्प | स्तु | मु | क्त | स्त | या |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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