क्षिप्तो हस्तावलग्नः प्रसभमभिहतोऽप्याददानोऽंशुकान्तं
गृह्णन्केशेष्वपास्तश्चरणनिपतितो नेक्षितः सम्भ्रमेण ।
आलिङ्गन्योऽवधूतस्त्रिपुरयुवतिभिः साश्रुनेत्रोत्पलाभिः
कामीवार्द्रापराधः स दहतु दुरितं शाम्भवो वः शराग्निः ॥
क्षिप्तो हस्तावलग्नः प्रसभमभिहतोऽप्याददानोऽंशुकान्तं
गृह्णन्केशेष्वपास्तश्चरणनिपतितो नेक्षितः सम्भ्रमेण ।
आलिङ्गन्योऽवधूतस्त्रिपुरयुवतिभिः साश्रुनेत्रोत्पलाभिः
कामीवार्द्रापराधः स दहतु दुरितं शाम्भवो वः शराग्निः ॥
गृह्णन्केशेष्वपास्तश्चरणनिपतितो नेक्षितः सम्भ्रमेण ।
आलिङ्गन्योऽवधूतस्त्रिपुरयुवतिभिः साश्रुनेत्रोत्पलाभिः
कामीवार्द्रापराधः स दहतु दुरितं शाम्भवो वः शराग्निः ॥
अन्वयः
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त्रिपुरयुवतिभिः साश्रुनेत्रोत्पलाभिः क्षिप्तः, हस्त-अवलग्नः (सन्) प्रसभम् अभिहतः, अंशुक-अन्तम् आददानः अपि, केशेषु गृह्णन् (सन्) अपास्तः, चरण-निपतितः (सन्) सम्भ्रमेण न ईक्षितः, आलिङ्ग्यः (सन्) अवधूतः, आर्द्र-अपराधः कामी इव, सः शाम्भवः शर-अग्निः वः दुरितं दहतु ।
Summary
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May Shiva's fiery arrow, which acted like a lover who has just committed an offense, burn away your sins. The women of Tripura, with tear-filled lotus-eyes, pushed it away, struck it when it clung to their hands, threw it off when it seized their hair, ignored it in agitation when it fell at their feet, and rejected it when it sought an embrace.
पदच्छेदः
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| क्षिप्तः | क्षिप्त (√क्षिप्+क्त, १.१) | pushed away |
| हस्त | हस्त | hand |
| अवलग्नः | अवलग्न (अव√लग्+क्त, १.१) | clinging to |
| प्रसभम् | प्रसभम् | forcefully |
| अभिहतः | अभिहत (अभि√हन्+क्त, १.१) | struck |
| अपि | अपि | even |
| आददानः | आददान (आ√दा+शानच्, १.१) | taking |
| अंशुक | अंशुक | garment |
| अन्तम् | अन्त (२.१) | the edge of |
| गृह्णन् | गृह्णत् (√ग्रह्+शतृ, १.१) | seizing |
| केशेषु | केश (७.३) | by the hair |
| अपास्तः | अपास्त (अप√अस्+क्त, १.१) | thrown off |
| चरण | चरण | feet |
| निपतितः | निपतित (नि√पत्+क्त, १.१) | fallen at |
| न | न | not |
| ईक्षितः | ईक्षित (√ईक्ष्+क्त, १.१) | looked at |
| सम्भ्रमेण | सम्भ्रम (३.१) | with agitation |
| आलिङ्ग्यः | आलिङ्ग्य (आ√लिङ्ग्+ण्यत्, १.१) | to be embraced |
| अवधूतः | अवधूत (अव√धू+क्त, १.१) | rejected |
| त्रिपुर | त्रिपुर | Tripura's |
| युवतिभिः | युवति (३.३) | by the women |
| स | स | with |
| अश्रु | अश्रु | tears |
| नेत्र | नेत्र | eyes |
| उत्पलाभिः | उत्पल (३.३) | like lotuses |
| कामी | कामिन् (१.१) | a lover |
| इव | इव | like |
| आर्द्र | आर्द्र | fresh |
| अपराधः | अपराध (१.१) | who has committed an offense |
| सः | तद् (१.१) | that |
| दहतु | दहतु (√दह् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may it burn |
| दुरितम् | दुरित (२.१) | sin |
| शाम्भवः | शाम्भव (१.१) | of Shiva |
| वः | युष्मद् (२.३) | your |
| शर | शर | arrow's |
| अग्निः | अग्नि (१.१) | fire |
छन्दः
स्रग्धरा [२१: मरभनययय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ | २० | २१ | २२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क्षि | प्तो | ह | स्ता | व | ल | ग्नः | प्र | स | भ | म | भि | ह | तो | ऽप्या | द | दा | नो | ऽं | शु | का | न्तं |
| गृ | ह्ण | न्के | शे | ष्व | पा | स्त | श्च | र | ण | नि | प | ति | तो | ने | क्षि | तः | स | म्भ्र | मे | ण | |
| आ | लि | ङ्ग | न्यो | ऽव | धू | त | स्त्रि | पु | र | यु | व | ति | भिः | सा | श्रु | ने | त्रो | त्प | ला | भिः | |
| का | मी | वा | र्द्रा | प | रा | धः | स | द | ह | तु | दु | रि | तं | शा | म्भ | वो | वः | श | रा | ग्निः | |
| म | र | भ | न | य | य | य | |||||||||||||||
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