दृष्ट्वैकासनसंस्थिते प्रियतमे पश्चाद् उपेत्यादराद्
एकस्या नयने पिधाय विहितक्रीडानुबन्धच्छलः ।
ईषद्वक्रिमकंधरः सपुलकः प्रेमोल्लसन्मानसाम्
अन्तर्हासलसत्कपोलफलकां धूर्तोऽपरां चुम्बति ॥
दृष्ट्वैकासनसंस्थिते प्रियतमे पश्चाद् उपेत्यादराद्
एकस्या नयने पिधाय विहितक्रीडानुबन्धच्छलः ।
ईषद्वक्रिमकंधरः सपुलकः प्रेमोल्लसन्मानसाम्
अन्तर्हासलसत्कपोलफलकां धूर्तोऽपरां चुम्बति ॥
एकस्या नयने पिधाय विहितक्रीडानुबन्धच्छलः ।
ईषद्वक्रिमकंधरः सपुलकः प्रेमोल्लसन्मानसाम्
अन्तर्हासलसत्कपोलफलकां धूर्तोऽपरां चुम्बति ॥
अन्वयः
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धूर्तः पश्चात् उपेत्य आदरात् एकासन-संस्थिते प्रियतमे दृष्ट्वा, एकस्याः नयने पिधाय विहित-क्रीडा-अनुबन्ध-च्छलः (सन्), ईषत्-वक्रिम-कंधरः स-पुलकः (सन्) प्रेम-उल्लसत्-मानसाम् अन्तर्हास-लसत्-कपोल-फलकाम् अपराम् चुम्बति ।
Summary
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A cunning man, seeing his two beloveds sitting together, approaches from behind. Pretending to play a game, he covers one's eyes. Then, with his neck slightly bent and thrilled, he kisses the other woman, whose face is lit by an inner smile, knowing her lover's affection.
पदच्छेदः
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| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश्+क्त्वा) | having seen |
| एक | एक | one |
| आसन | आसन | seat |
| संस्थिते | संस्थित (२.२) | sitting on |
| प्रियतमे | प्रियतमा (२.२) | the two beloveds |
| पश्चात् | पश्चात् | from behind |
| उपेत्य | उपेत्य (उप√इ+ल्यप्) | having approached |
| आदरात् | आदर (५.१) | with affection |
| एकस्याः | एका (६.१) | of one |
| नयने | नयन (२.२) | the two eyes |
| पिधाय | पिधाय (अपि√धा+ल्यप्) | having covered |
| विहित | विहित (वि√धा+क्त) | made |
| क्रीडा | क्रीडा | game |
| अनुबन्ध | अनुबन्ध | continuation |
| च्छलः | छल (१.१) | under the pretext of a |
| ईषत् | ईषत् | slightly |
| वक्रिम | वक्रिमन् | bent |
| कंधरः | कंधर (१.१) | whose neck is |
| सपुलकः | सपुलक (१.१) | thrilled (with goosebumps) |
| प्रेम | प्रेमन् | with love |
| उल्लसत् | उल्लसत् (उद्√लस्+शतृ) | shining |
| मानसाम् | मानस (२.१) | whose heart is |
| अन्तर्हास | अन्तर्हास | inner smile |
| लसत् | लसत् (√लस्+शतृ) | shining |
| कपोल | कपोल | cheeks |
| फलकाम् | फलक (२.१) | whose broad |
| धूर्तः | धूर्त (१.१) | the cunning man |
| अपराम् | अपरा (२.१) | the other one |
| चुम्बति | चुम्बति (√चुम्ब् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | kisses |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दृ | ष्ट्वै | का | स | न | सं | स्थि | ते | प्रि | य | त | मे | प | श्चा | दु | पे | त्या | द | रा |
| दे | क | स्या | न | य | ने | पि | धा | य | वि | हि | त | क्री | डा | नु | ब | न्ध | च्छ | लः |
| ई | ष | द्व | क्रि | म | कं | ध | रः | स | पु | ल | कः | प्रे | मो | ल्ल | स | न्मा | न | सा |
| म | न्त | र्हा | स | ल | स | त्क | पो | ल | फ | ल | कां | धू | र्तो | ऽप | रां | चु | म्ब | ति |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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