धीरं वारिधरस्य वारि किरतः श्रुत्वा निशीथे ध्वनिं
दीर्घोच्छ्वासमुदश्रुणा विरहिणीं बालां चिरं ध्यायता ।
अध्वन्येन विमुक्तकण्ठमखिलां रात्रिं तथा क्रन्दितं
ग्रामीणैर्व्रजतो जनस्य वसतिर्ग्रामे निषिद्धा यथा ॥
धीरं वारिधरस्य वारि किरतः श्रुत्वा निशीथे ध्वनिं
दीर्घोच्छ्वासमुदश्रुणा विरहिणीं बालां चिरं ध्यायता ।
अध्वन्येन विमुक्तकण्ठमखिलां रात्रिं तथा क्रन्दितं
ग्रामीणैर्व्रजतो जनस्य वसतिर्ग्रामे निषिद्धा यथा ॥
दीर्घोच्छ्वासमुदश्रुणा विरहिणीं बालां चिरं ध्यायता ।
अध्वन्येन विमुक्तकण्ठमखिलां रात्रिं तथा क्रन्दितं
ग्रामीणैर्व्रजतो जनस्य वसतिर्ग्रामे निषिद्धा यथा ॥
अन्वयः
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निशीथे वारिधरस्य वारि किरतः धीरं ध्वनिं श्रुत्वा, दीर्घ-उच्छ्वासम् उदश्रुणा विरहिणीं बालां चिरं ध्यायता अध्वन्येन विमुक्त-कण्ठम् अखिलां रात्रिं तथा क्रन्दितं यथा व्रजतः जनस्य ग्रामे वसतिः ग्रामीणैः निषिद्धा ।
Summary
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A traveler, hearing the deep sound of a thundering cloud at midnight, thought of his beloved wife, sighing and tearful in her separation. He cried so loudly all night that the villagers forbade any other travelers from staying in their village.
पदच्छेदः
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| धीरम् | धीरम् | deeply/gravely |
| वारिधरस्य | वारिधर (६.१) | of the cloud |
| वारि | वारि (२.१) | water |
| किरतः | किरत् (√कॄ+शतृ, ६.१) | of it scattering |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु+क्त्वा) | having heard |
| निशीथे | निशीथ (७.१) | at midnight |
| ध्वनिम् | ध्वनि (२.१) | the sound |
| दीर्घ | दीर्घ | long |
| उच्छ्वासम् | उच्छ्वास (२.१) | sighing |
| उदश्रुणा | उदश्रु (२.१) | tearful |
| विरहिणीम् | विरहिणी (२.१) | separated (from her lover) |
| बालाम् | बाला (२.१) | the young woman |
| चिरम् | चिरम् | for a long time |
| ध्यायता | ध्यायत् (√ध्यै+शतृ, ३.१) | by him who was thinking of |
| अध्वन्येन | अध्वन्य (३.१) | by the traveler |
| विमुक्त | विमुक्त (वि√मुच्+क्त) | unrestrainedly |
| कण्ठम् | कण्ठम् | at the top of his voice |
| अखिलाम् | अखिल (२.१) | the entire |
| रात्रिम् | रात्रि (२.१) | night |
| तथा | तथा | so |
| क्रन्दितम् | क्रन्दित (√क्रन्द्+क्त, १.१) | it was cried |
| ग्रामीणैः | ग्रामीण (३.३) | by the villagers |
| व्रजतः | व्रजत् (√व्रज्+शतृ, ६.१) | of a traveling |
| जनस्य | जन (६.१) | person |
| वसतिः | वसति (१.१) | staying |
| ग्रामे | ग्राम (७.१) | in the village |
| निषिद्धा | निषिद्ध (नि√सिध्+क्त, १.१) | was forbidden |
| यथा | यथा | that |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| धी | रं | वा | रि | ध | र | स्य | वा | रि | कि | र | तः | श्रु | त्वा | नि | शी | थे | ध्व | निं |
| दी | र्घो | च्छ्वा | स | मु | द | श्रु | णा | वि | र | हि | णीं | बा | लां | चि | रं | ध्या | य | ता |
| अ | ध्व | न्ये | न | वि | मु | क्त | क | ण्ठ | म | खि | लां | रा | त्रिं | त | था | क्र | न्दि | तं |
| ग्रा | मी | णै | र्व्र | ज | तो | ज | न | स्य | व | स | ति | र्ग्रा | मे | नि | षि | द्धा | य | था |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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