प्रासादे सा दिशि दिशि च सा पृष्ठतः सा पुरः सा
पर्यङ्के सा पथि पथि च सा तद्वियोगातुरस्य ।
हंहो चेतः प्रकृतिरपरा नास्ति मे कापि सा सा
सा सा सा सा जगति सकले कोऽयमद्वैतवादः ॥
प्रासादे सा दिशि दिशि च सा पृष्ठतः सा पुरः सा
पर्यङ्के सा पथि पथि च सा तद्वियोगातुरस्य ।
हंहो चेतः प्रकृतिरपरा नास्ति मे कापि सा सा
सा सा सा सा जगति सकले कोऽयमद्वैतवादः ॥
पर्यङ्के सा पथि पथि च सा तद्वियोगातुरस्य ।
हंहो चेतः प्रकृतिरपरा नास्ति मे कापि सा सा
सा सा सा सा जगति सकले कोऽयमद्वैतवादः ॥
अन्वयः
AI
तत्-वियोग-आतुरस्य मे प्रासादे सा, दिशि दिशि च सा, पृष्ठतः सा, पुरः सा, पर्यङ्के सा, पथि पथि च सा (अस्ति) । हंहो चेतः, मे अपरा का अपि प्रकृतिः न अस्ति । जगति सकले सा सा सा सा सा सा (एव अस्ति) । अयम् कः अद्वैत-वादः?
Summary
AI
For me, who is afflicted by separation from her, she is in the palace, in every direction, behind me, in front of me, on the couch, and on every path. Oh mind, I have no other state of being! In the entire world, there is only she, she, she, she, she, she. What is this doctrine of non-duality that has overcome me?
पदच्छेदः
AI
| प्रासादे | प्रासाद (७.१) | in the palace |
| सा | तद् (१.१) | she |
| दिशि | दिश् (७.१) | in direction |
| दिशि | दिश् (७.१) | in direction |
| च | च | and |
| सा | तद् (१.१) | she |
| पृष्ठतः | पृष्ठतः | behind |
| सा | तद् (१.१) | she |
| पुरः | पुरस् | in front |
| सा | तद् (१.१) | she |
| पर्यङ्के | पर्यङ्क (७.१) | on the couch |
| सा | तद् (१.१) | she |
| पथि | पथिन् (७.१) | on the path |
| पथि | पथिन् (७.१) | on the path |
| च | च | and |
| सा | तद् (१.१) | she |
| तद्वियोगातुरस्य | तद्–वियोग–आतुर (६.१) | of me, afflicted by separation from her |
| हंहो | हंहो | Oh! |
| चेतः | चेतस् (८.१) | O mind! |
| प्रकृतिः | प्रकृति (१.१) | state |
| अपरा | अपर (१.१) | another |
| न | न | not |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| कापि | का (१.१)–अपि | any |
| सा | तद् (१.१) | she |
| सा | तद् (१.१) | she |
| सा | तद् (१.१) | she |
| सा | तद् (१.१) | she |
| सा | तद् (१.१) | she |
| सा | तद् (१.१) | she |
| जगति | जगत् (७.१) | in the world |
| सकले | सकल (७.१) | entire |
| कः | किम् (१.१) | what |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| अद्वैतवादः | अद्वैत–वाद (१.१) | doctrine of non-duality |
छन्दः
मन्दाक्रान्ता [१७: मभनततगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रा | सा | दे | सा | दि | शि | दि | शि | च | सा | पृ | ष्ठ | तः | सा | पु | रः | सा |
| प | र्य | ङ्के | सा | प | थि | प | थि | च | सा | त | द्वि | यो | गा | तु | र | स्य |
| हं | हो | चे | तः | प्र | कृ | ति | र | प | रा | ना | स्ति | मे | का | पि | सा | सा |
| सा | सा | सा | सा | ज | ग | ति | स | क | ले | को | ऽय | म | द्वै | त | वा | दः |
| म | भ | न | त | त | ग | ग | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.