कान्ते तल्पमुपागते विगलिता नीवी स्वयं बन्धना-
द्वासो विश्लथमेखलागुणधृतं किंचिन्नितम्बे स्थितम् ।
एतावत्सखि वेद्मि साम्प्रतमहं तस्याङ्गसङ्गे पुनः
कोऽयं कास्मि रतं नु वा कथमिति स्वल्पापि मे न स्मृतिः ॥
कान्ते तल्पमुपागते विगलिता नीवी स्वयं बन्धना-
द्वासो विश्लथमेखलागुणधृतं किंचिन्नितम्बे स्थितम् ।
एतावत्सखि वेद्मि साम्प्रतमहं तस्याङ्गसङ्गे पुनः
कोऽयं कास्मि रतं नु वा कथमिति स्वल्पापि मे न स्मृतिः ॥
द्वासो विश्लथमेखलागुणधृतं किंचिन्नितम्बे स्थितम् ।
एतावत्सखि वेद्मि साम्प्रतमहं तस्याङ्गसङ्गे पुनः
कोऽयं कास्मि रतं नु वा कथमिति स्वल्पापि मे न स्मृतिः ॥
अन्वयः
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सखि, कान्ते तल्पम् उपागते (सति), नीवी बन्धनात् स्वयम् विगलिता । वासः विश्लथ-मेखला-गुण-धृतम् (सत्) किञ्चित् नितम्बे स्थितम् । सखि, साम्प्रतम् अहम् एतावत् वेद्मि । पुनः तस्य अङ्ग-सङ्गे 'कः अयम्? का अस्मि? रतम् नु वा कथम्?' इति मे स्वल्पा अपि स्मृतिः न (अस्ति) ।
Summary
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"O friend, when my beloved came to bed, the knot of my garment untied itself, and my dress, barely held by the loosened girdle, remained on my hips. This much I remember. But once our bodies united, I have not the slightest memory of who he was, who I was, or how our lovemaking happened."
पदच्छेदः
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| कान्ते | कान्त (७.१) | when the beloved |
| तल्पम् | तल्प (२.१) | the bed |
| उपागते | उपागत (उप+आ√गम्+क्त, ७.१) | had approached |
| विगलिता | विगलित (वि√गल्+क्त, १.१) | slipped off |
| नीवी | नीवी (१.१) | the knot of the garment |
| स्वयम् | स्वयम् | by itself |
| बन्धनात् | बन्धन (५.१) | from its fastening |
| वासः | वासस् (१.१) | the garment |
| विश्लथमेखलागुणधृतम् | विश्लथ–मेखला–गुण–धृत (√धृ+क्त, १.१) | held by the loosened girdle-string |
| किञ्चित् | किञ्चित् | barely |
| नितम्बे | नितम्ब (७.१) | on the hip |
| स्थितम् | स्थित (√स्था+क्त, १.१) | remained |
| एतावत् | एतावत् (२.१) | this much |
| सखि | सखि (८.१) | O friend |
| वेद्मि | वेद्मि (√विद् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I know |
| साम्प्रतम् | साम्प्रतम् | now |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| अङ्गसङ्गे | अङ्ग–सङ्ग (७.१) | in the union of bodies |
| पुनः | पुनर् | but then |
| कः | किम् (१.१) | who |
| अयम् | इदम् (१.१) | is this (man) |
| का | किम् (१.१) | who |
| अस्मि | अस्मि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | am I |
| रतम् | रत (१.१) | the lovemaking |
| नु | नु | indeed |
| वा | वा | or |
| कथम् | कथम् | how (was it) |
| इति | इति | thus |
| स्वल्पा | स्वल्प (१.१) | even a little |
| अपि | अपि | even |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| न | न | no |
| स्मृतिः | स्मृति (१.१) | memory |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| का | न्ते | त | ल्प | मु | पा | ग | ते | वि | ग | लि | ता | नी | वी | स्व | यं | ब | न्ध | ना |
| द्वा | सो | वि | श्ल | थ | मे | ख | ला | गु | ण | धृ | तं | किं | चि | न्नि | त | म्बे | स्थि | तम् |
| ए | ता | व | त्स | खि | वे | द्मि | सा | म्प्र | त | म | हं | त | स्या | ङ्ग | स | ङ्गे | पु | नः |
| को | ऽयं | का | स्मि | र | तं | नु | वा | क | थ | मि | ति | स्व | ल्पा | पि | मे | न | स्मृ | तिः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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