अनालोच्य प्रेम्णः परिणतिमनादृत्य सुहृद-
स्त्वयाकाण्डे मानः किमिति सरले प्रेयसि कृतः ।
समाकृष्टा ह्येते विरहदहनोद्भासुरशिखाः
स्वहस्तेनाङ्गारास्तद् अलमधुनारण्यरुदितैः ॥
अनालोच्य प्रेम्णः परिणतिमनादृत्य सुहृद-
स्त्वयाकाण्डे मानः किमिति सरले प्रेयसि कृतः ।
समाकृष्टा ह्येते विरहदहनोद्भासुरशिखाः
स्वहस्तेनाङ्गारास्तद् अलमधुनारण्यरुदितैः ॥
स्त्वयाकाण्डे मानः किमिति सरले प्रेयसि कृतः ।
समाकृष्टा ह्येते विरहदहनोद्भासुरशिखाः
स्वहस्तेनाङ्गारास्तद् अलमधुनारण्यरुदितैः ॥
अन्वयः
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सरले, प्रेम्णः परिणतिम् अनालोच्य, सुहृदः अनादृत्य, त्वया प्रेयसि अकाण्डे मानः किम् इति कृतः? हि एते विरह-दहन-उद्भासुर-शिखाः अङ्गाराः स्व-हस्तेन समाकृष्टाः । तत् अधुना अरण्य-रुदितैः अलम् ।
Summary
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"O simple one, why did you show anger towards your beloved at the wrong time, without considering love's outcome and ignoring your friends? With your own hand, you have gathered burning coals whose flames are the fire of separation. Therefore, enough now with this useless lamentation in the wilderness."
पदच्छेदः
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| अनालोच्य | अनालोच्य (आ√लोच्+ल्यप्) | without considering |
| प्रेम्णः | प्रेमन् (६.१) | of love |
| परिणतिम् | परिणति (२.१) | the consequence |
| अनादृत्य | अनादृत्य (आ√दृ+ल्यप्) | without heeding |
| सुहृदः | सुहृद् (२.३) | friends |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| अकाण्डे | अकाण्ड (७.१) | at an inappropriate time |
| मानः | मान (१.१) | anger |
| किमिति | किम्–इति | why |
| सरले | सरला (८.१) | O simple one |
| प्रेयसि | प्रेयस् (७.१) | towards the beloved |
| कृतः | कृत (√कृ+क्त, १.१) | was done |
| समाकृष्टाः | समाकृष्ट (सम्+आ√कृष्+क्त, १.३) | have been gathered |
| हि | हि | for indeed |
| एते | एतद् (१.३) | these |
| विरहदहनोद्भासुरशिखाः | विरह–दहन–उद्भासुर–शिखा (१.३) | whose flames are the blazing fire of separation |
| स्वहस्तेन | स्व–हस्त (३.१) | with your own hand |
| अङ्गाराः | अङ्गार (१.३) | burning coals |
| तत् | तद् | therefore |
| अलम् | अलम् | enough |
| अधुना | अधुना | now |
| अरण्यरुदितैः | अरण्य–रुदित (३.३) | with useless lamentation |
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ना | लो | च्य | प्रे | म्णः | प | रि | ण | ति | म | ना | दृ | त्य | सु | हृ | द |
| स्त्व | या | का | ण्डे | मा | नः | कि | मि | ति | स | र | ले | प्रे | य | सि | कृ | तः |
| स | मा | कृ | ष्टा | ह्ये | ते | वि | र | ह | द | ह | नो | द्भा | सु | र | शि | खाः |
| स्व | ह | स्ते | ना | ङ्गा | रा | स्त | द | ल | म | धु | ना | र | ण्य | रु | दि | तैः |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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