अन्वयः
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मूढाः मम परम् भूतमहेश्वरम् भावम् अजानन्तः मानुषीम् तनुम् आश्रितम् माम् अवजानन्ति ।
Summary
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Fools disregard Me when I descend in a human form. They do not know My supreme nature as the great Lord of all beings.
सारांश
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मूर्ख लोग मेरे परम भाव को और मुझे समस्त प्राणियों का महान ईश्वर न जानकर, मनुष्य रूप में अवतरित मेरा तिरस्कार करते हैं।
पदच्छेदः
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| अवजानन्ति | अवजानन्ति (अव√ज्ञा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | disregard |
| माम् | अस्मद् (२.१) | Me |
| मूढाः | मूढ (१.३) | fools |
| मानुषीम् | मानुषी (२.१) | human |
| तनुम् | तनु (२.१) | form |
| आश्रितम् | आश्रित (आ√श्रि+क्त, २.१) | having assumed |
| परम् | पर (२.१) | supreme |
| भावम् | भाव (२.१) | nature |
| अजानन्तः | अजानत् (अ√ज्ञा+शतृ, १.३) | not knowing |
| मम | अस्मद् (६.१) | My |
| भूतमहेश्वरम् | भूत–महा–ईश्वर (२.१) | the great Lord of all beings |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | व | जा | न | न्ति | मां | मू | ढा |
| मा | नु | षीं | त | नु | मा | श्रि | तम् |
| प | रं | भा | व | म | जा | न | न्तो |
| म | म | भू | त | म | हे | श्व | रम् |
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