तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः ।
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥

अन्वयः AI तस्मात्, महाबाहो, यस्य इन्द्रियाणि इन्द्रियार्थेभ्यः सर्वशः निगृहीतानि (सन्ति), तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता (भवति) ।
Summary AI Therefore, O mighty-armed one, he whose senses are completely restrained from their objects, his wisdom is firmly established.
सारांश AI इसलिए हे महाबाहु अर्जुन, जिस मनुष्य की इंद्रियां इंद्रिय-विषयों से सब प्रकार से विरक्त होकर वश में रहती हैं, उसी की बुद्धि वास्तव में स्थिर होती है।
पदच्छेदः AI
तस्मात्तस्मात् therefore
यस्ययद् (६.१) whose
महाबाहोमहाबाहु (८.१) O mighty-armed one
निगृहीतानिनिगृहीत (नि√ग्रह्+क्त, १.३) are restrained
सर्वशःसर्वशः completely
इन्द्रियाणिइन्द्रिय (१.३) senses
इन्द्रियार्थेभ्यःइन्द्रियअर्थ (५.३) from the sense objects
तस्यतद् (६.१) his
प्रज्ञाप्रज्ञा (१.१) wisdom
प्रतिष्ठिताप्रतिष्ठित (प्रति√स्था+क्त, १.१) is firmly established
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
स्मा द्य स्य हा बा हो
नि गृ ही ता नि र्व शः
न्द्रि या णी न्द्रि या र्थे भ्य
स्त स्य प्र ज्ञा प्र ति ष्ठि ता
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