ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य मत्पराः ।
अनन्येनैव योगेन मां ध्यायन्त उपासते ॥

अन्वयः AI ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य, मत्-पराः (सन्तः), अनन्येन एव योगेन माम् ध्यायन्तः उपासते...
Summary AI "But those who, renouncing all actions in Me and regarding Me as the supreme goal, worship Me, meditating on Me with single-minded devotion..."
सारांश AI जो अपने समस्त कर्मों को मुझमें अर्पण कर, अनन्य भक्ति भाव से मेरा ही ध्यान और उपासना करते हैं।
पदच्छेदः AI
येयद् (१.३) Those who
तुतु but
सर्वाणिसर्व (२.३) all
कर्माणिकर्मन् (२.३) actions
मयिअस्मद् (७.१) in Me
संन्यस्यसंन्यस्य (सम्+नि√अस्+ल्यप्) renouncing
मत्पराःमत्पर (१.३) regarding Me as the supreme goal
अनन्येनअनन्य (३.१) with single-minded
एवएव indeed
योगेनयोग (३.१) devotion
माम्अस्मद् (२.१) Me
ध्यायन्तःध्यायत् (√ध्यै+शतृ, १.३) meditating
उपासतेउपासते (उद्√आस् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) worship
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
ये तु र्वा णि र्मा णि
यि सं न्य स्य त्प राः
न्ये नै यो गे
मां ध्या न्त पा ते
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