सीमन्तं निजमनुबध्नती कराभ्या-
मालक्ष्यस्तनतटबाहुमूलभागा ।
भर्त्रान्या मुहुरभिलष्यता निदध्ये
नैवाहो विरमति कौतुकं प्रियेभ्यः ॥
सीमन्तं निजमनुबध्नती कराभ्या-
मालक्ष्यस्तनतटबाहुमूलभागा ।
भर्त्रान्या मुहुरभिलष्यता निदध्ये
नैवाहो विरमति कौतुकं प्रियेभ्यः ॥
मालक्ष्यस्तनतटबाहुमूलभागा ।
भर्त्रान्या मुहुरभिलष्यता निदध्ये
नैवाहो विरमति कौतुकं प्रियेभ्यः ॥
छन्दः
प्रहर्षिणी [१३: मनजरग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सी | म | न्तं | नि | ज | म | नु | ब | ध्न | ती | क | रा | भ्या |
| मा | ल | क्ष्य | स्त | न | त | ट | बा | हु | मू | ल | भा | गा |
| भ | र्त्रा | न्या | मु | हु | र | भि | ल | ष्य | ता | नि | द | ध्ये |
| नै | वा | हो | वि | र | म | ति | कौ | तु | कं | प्रि | ये | भ्यः |
| म | न | ज | र | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.