प्रियकरपरिमार्गदङ्गनानां यदाभू-
त्पुनरधिकतरैव स्वेदतोयोदयश्रीः ।
अथ वपुरभिषेक्तुं तास्तदाम्भोभिरीषु-
र्वनविहरणखेदम्लानमम्लानशोभाः ॥
प्रियकरपरिमार्गदङ्गनानां यदाभू-
त्पुनरधिकतरैव स्वेदतोयोदयश्रीः ।
अथ वपुरभिषेक्तुं तास्तदाम्भोभिरीषु-
र्वनविहरणखेदम्लानमम्लानशोभाः ॥
त्पुनरधिकतरैव स्वेदतोयोदयश्रीः ।
अथ वपुरभिषेक्तुं तास्तदाम्भोभिरीषु-
र्वनविहरणखेदम्लानमम्लानशोभाः ॥
छन्दः
मालिनी [१५: ननमयय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रि | य | क | र | प | रि | मा | र्ग | द | ङ्ग | ना | नां | य | दा | भू |
| त्पु | न | र | धि | क | त | रै | व | स्वे | द | तो | यो | द | य | श्रीः |
| अ | थ | व | पु | र | भि | षे | क्तुं | ता | स्त | दा | म्भो | भि | री | षु |
| र्व | न | वि | ह | र | ण | खे | द | म्ला | न | म | म्ला | न | शो | भाः |
| न | न | म | य | य | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.