व्रततिविततिभिस्तिरोहितायां
प्रतियुवतौ वदनं प्रियः प्रियायाः ।
यदधयदधरावलोपनृत्य-
त्करवलयस्वनितेन तद्विवव्रे ॥
व्रततिविततिभिस्तिरोहितायां
प्रतियुवतौ वदनं प्रियः प्रियायाः ।
यदधयदधरावलोपनृत्य-
त्करवलयस्वनितेन तद्विवव्रे ॥
प्रतियुवतौ वदनं प्रियः प्रियायाः ।
यदधयदधरावलोपनृत्य-
त्करवलयस्वनितेन तद्विवव्रे ॥
मल्लिनाथः
व्रततीति ॥ प्रतिकूला युवतिः प्रतियुवतिः सपत्नी तस्यां व्रततिविततयो, लताजालानि । `वल्ली तु व्रततिर्लता` इत्यमरः । ताभिस्तिरोहितायां सत्यां प्रियः प्रियाया वदनमधयदपिबदिति यत् । धेटो भौवादिकाल्लङ् । तद्दनपानमधरावलोपेनाधरखण्डनेन । तज्जनितव्यथयेत्यर्थः । नृत्यतोश्चलतोः करयोर्वलयानां कङ्कणानां स्वनितेन ध्वनिना विवव्रे विवृतम् । तदेव तस्यास्तदनुमापकमभूदित्यर्थः । अत्रैका हृष्टा अपरा त्वीया॑निर्वेदवतीत्यनुसंधेयम्
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व्र | त | ति | वि | त | ति | भि | स्ति | रो | हि | ता | यां | |
| प्र | ति | यु | व | तौ | व | द | नं | प्रि | यः | प्रि | या | याः |
| य | द | ध | य | द | ध | रा | व | लो | प | नृ | त्य | |
| त्क | र | व | ल | य | स्व | नि | ते | न | त | द्वि | व | व्रे |
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