अभिमुखमुपयाति मा स्म किञ्चि-
त्त्वमभिदधाः पटले मधुव्रतानाम् ।
मधुसुरभिमुखाब्जगन्धलब्धे-
रधिकमधित्वदनेन मा निपाति ॥
अभिमुखमुपयाति मा स्म किञ्चि-
त्त्वमभिदधाः पटले मधुव्रतानाम् ।
मधुसुरभिमुखाब्जगन्धलब्धे-
रधिकमधित्वदनेन मा निपाति ॥
त्त्वमभिदधाः पटले मधुव्रतानाम् ।
मधुसुरभिमुखाब्जगन्धलब्धे-
रधिकमधित्वदनेन मा निपाति ॥
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | भि | मु | ख | मु | प | या | ति | मा | स्म | कि | ञ्चि | |
| त्त्व | म | भि | द | धाः | प | ट | ले | म | धु | व्र | ता | नाम् |
| म | धु | सु | र | भि | मु | खा | ब्ज | ग | न्ध | ल | ब्धे | |
| र | धि | क | म | धि | त्व | द | ने | न | मा | नि | पा | ति |
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