दन्तालिकाधरणनिश्चलपाणियुग्म-
मर्धोदितो हरिरिवोदयशैलमूर्ध्नः ।
स्तोकेन नाक्रमत वल्लभपालमुच्चैः
श्रीवृक्षकी पुरुषकोन्नमिताग्रकायः ॥

छन्दः वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४
न्ता लि का नि श्च पा णि यु ग्म
र्धो दि तो रि रि वो शै मू र्ध्नः
स्तो के ना क्र ल्ल पा मु च्चैः
श्री वृ क्ष की पु रु को न्न मि ता ग्र का यः
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