भवति स्फुटमागतो विपक्षा-
न्न सपक्षोऽपि हि निर्वृतेर्विधाता ।
शिशुपालबलानि कृष्णमुक्तः
सुतरां तेन तताप तोमरौघः ॥
भवति स्फुटमागतो विपक्षा-
न्न सपक्षोऽपि हि निर्वृतेर्विधाता ।
शिशुपालबलानि कृष्णमुक्तः
सुतरां तेन तताप तोमरौघः ॥
न्न सपक्षोऽपि हि निर्वृतेर्विधाता ।
शिशुपालबलानि कृष्णमुक्तः
सुतरां तेन तताप तोमरौघः ॥
छन्दः
औपच्छन्दसिक
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ | व | ति | स्फु | ट | मा | ग | तो | वि | प | क्षा | |
| न्न | स | प | क्षो | ऽपि | हि | नि | र्वृ | ते | र्वि | धा | ता |
| शि | शु | पा | ल | ब | ला | नि | कृ | ष्ण | मु | क्तः | |
| सु | त | रां | ते | न | त | ता | प | तो | म | रौ | घः |
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