रोषावेशादाभिमुख्येन कौचि-
त्पाणिग्राहं रंहसैवोपयातौ ।
हित्वा हेतीर्मल्लवन्मुष्टिघातं
घ्नन्तौ बाहूबाहवि व्यासृजेताम् ॥
रोषावेशादाभिमुख्येन कौचि-
त्पाणिग्राहं रंहसैवोपयातौ ।
हित्वा हेतीर्मल्लवन्मुष्टिघातं
घ्नन्तौ बाहूबाहवि व्यासृजेताम् ॥
त्पाणिग्राहं रंहसैवोपयातौ ।
हित्वा हेतीर्मल्लवन्मुष्टिघातं
घ्नन्तौ बाहूबाहवि व्यासृजेताम् ॥
छन्दः
शालिनी [११: मततगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रो | षा | वे | शा | दा | भि | मु | ख्ये | न | कौ | चि |
| त्पा | णि | ग्रा | हं | रं | ह | सै | वो | प | या | तौ |
| हि | त्वा | हे | ती | र्म | ल्ल | व | न्मु | ष्टि | घा | तं |
| घ्न | न्तौ | बा | हू | बा | ह | वि | व्या | सृ | जे | ताम् |
| म | त | त | ग | ग | ||||||
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