यियासितामथ मधुभिद्विवस्वता
जनो जरन्महिषविषाणधूसराम् ।
पुरः पतत्परबलरेणुमालिनी-
मलक्षयद्दिशमभिधूमितामिव ॥
यियासितामथ मधुभिद्विवस्वता
जनो जरन्महिषविषाणधूसराम् ।
पुरः पतत्परबलरेणुमालिनी-
मलक्षयद्दिशमभिधूमितामिव ॥
जनो जरन्महिषविषाणधूसराम् ।
पुरः पतत्परबलरेणुमालिनी-
मलक्षयद्दिशमभिधूमितामिव ॥
छन्दः
रुचिरा [१३: जभसजग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यि | या | सि | ता | म | थ | म | धु | भि | द्वि | व | स्व | ता |
| ज | नो | ज | र | न्म | हि | ष | वि | षा | ण | धू | स | राम् |
| पु | रः | प | त | त्प | र | ब | ल | रे | णु | मा | लि | नी |
| म | ल | क्ष | य | द्दि | श | म | भि | धू | मि | ता | मि | व |
| ज | भ | स | ज | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.