पृथिवीं बिभर्थ यदि पूर्व-
मिदमपि गुणाय वर्तते ।
भूमिभृदिति परहारितभू-
स्त्वमुदाह्रियस्व कथमन्यथा जनैः ॥
पृथिवीं बिभर्थ यदि पूर्व-
मिदमपि गुणाय वर्तते ।
भूमिभृदिति परहारितभू-
स्त्वमुदाह्रियस्व कथमन्यथा जनैः ॥
मिदमपि गुणाय वर्तते ।
भूमिभृदिति परहारितभू-
स्त्वमुदाह्रियस्व कथमन्यथा जनैः ॥
छन्दः
उद्गता []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पृ | थि | वीं | बि | भ | र्थ | य | दि | पू | र्व | |||
| मि | द | म | पि | गु | णा | य | व | र्त | ते | |||
| भू | मि | भृ | दि | ति | प | र | हा | रि | त | भू | ||
| स्त्व | मु | दा | ह्रि | य | स्व | क | थ | म | न्य | था | ज | नैः |
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