सुतरां सुखेन सकलक्लमच्छिदा
सनिदाधमङ्गमिव मातरिश्वना ।
यदुनन्दनेन तदुदन्वतः पयः
शसिनेव राजकुलमाप नन्दथुम् ॥
सुतरां सुखेन सकलक्लमच्छिदा
सनिदाधमङ्गमिव मातरिश्वना ।
यदुनन्दनेन तदुदन्वतः पयः
शसिनेव राजकुलमाप नन्दथुम् ॥
सनिदाधमङ्गमिव मातरिश्वना ।
यदुनन्दनेन तदुदन्वतः पयः
शसिनेव राजकुलमाप नन्दथुम् ॥
मल्लिनाथः
सुतरामिति ॥ तद्राजकुलं कुरुकुलम् । सकलक्लमच्छिदा सकलदुःखहारिणा यदुनन्दनेन कृष्णेन सनिदाघं ससंतापमङ्गं मातरिश्वना वायुनेव उदकान्यस्य सन्तीत्युदन्वानुदधिः । `उदन्वानुदधौ च` (अष्टाध्यायी ८.२.१३ ) इति निपातः । तस्य पयो जलं शशिनेव सुतरामत्यन्तम् । `किमेत्तिङव्यय-` (अष्टाध्यायी ५.४.११ ) इत्यामुप्रत्ययः । सुखेनाक्लेशेन नन्दथुमानन्दमाप । `स्यादानन्दथुरानन्दः` इत्यमरः । `ट्वितोऽथुच्` (अष्टाध्यायी ३.३.८९ ) इत्यथुच्प्रत्ययः । मालोपमा
छन्दः
मञ्जुभाषिणी [१३: सजसजग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | त | रां | सु | खे | न | स | क | ल | क्ल | म | च्छि | दा |
| स | नि | दा | ध | म | ङ्ग | मि | व | मा | त | रि | श्व | ना |
| य | दु | न | न्द | ने | न | त | दु | द | न्व | तः | प | यः |
| श | सि | ने | व | रा | ज | कु | ल | मा | प | न | न्द | थुम् |
| स | ज | स | ज | ग | ||||||||
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