नलिनी निगूढसलिला च यत्र सा
स्थलमित्यधः पतति या सुयोधने ।
अनिलात्मजप्रहसनाकुलाखिल-
क्षितिपक्षयागमनिमित्ततां ययौ ॥
नलिनी निगूढसलिला च यत्र सा
स्थलमित्यधः पतति या सुयोधने ।
अनिलात्मजप्रहसनाकुलाखिल-
क्षितिपक्षयागमनिमित्ततां ययौ ॥
स्थलमित्यधः पतति या सुयोधने ।
अनिलात्मजप्रहसनाकुलाखिल-
क्षितिपक्षयागमनिमित्ततां ययौ ॥
मल्लिनाथः
&#३२; नलिनीति ॥ यत्र सभायां निगूढसलिला दलच्छन्नत्वाददृश्यसलिला नलिनी । वर्तत इति शेषः । या नलिनी सुष्टु युध्यत इति सुयोधने दुर्योधने । `भाषायां शासियुधिदृशिधृषिभ्यो युच् वक्तव्यः` (वा०)। स्थलमिति भ्रान्त्या अधः पतति सति अनिलात्मजस्य भीमसेनस्य प्रहसनेनाट्टहासेनाकुलानां क्षुभितानामखिलक्षितिपानां क्षयागमे नाशप्राप्तौ निमित्ततां ययौ । नलिनीदलच्छन्नत्वात्सुयोधनस्य जले स्थलभ्रान्तिः तया तस्य पातस्तेन भीमसेनप्रहासस्तेन राज्ञां क्षोभस्ततस्तेषां मारणो रणः प्रवृत्त इति परम्परया तत्क्षयकारणत्वं गतेत्यर्थः । अत्र सभावर्णनाङ्गतया भीमसेनादिचरितवर्णनादुदात्तालंकारभेदः । लक्षणं चोक्तम्
छन्दः
मञ्जुभाषिणी [१३: सजसजग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | लि | नी | नि | गू | ढ | स | लि | ला | च | य | त्र | सा |
| स्थ | ल | मि | त्य | धः | प | त | ति | या | सु | यो | ध | ने |
| अ | नि | ला | त्म | ज | प्र | ह | स | ना | कु | ला | खि | ल |
| क्षि | ति | प | क्ष | या | ग | म | नि | मि | त्त | तां | य | यौ |
| स | ज | स | ज | ग | ||||||||
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