अकृतस्वसद्मगमनादरः क्षणं
लिपिकर्मनिर्मित इव व्यतिष्ठत ।
गतमच्युतेन सह शून्यतां गतः
प्रतिपालयन्मन इवाङ्गनाजनः ॥
अकृतस्वसद्मगमनादरः क्षणं
लिपिकर्मनिर्मित इव व्यतिष्ठत ।
गतमच्युतेन सह शून्यतां गतः
प्रतिपालयन्मन इवाङ्गनाजनः ॥
लिपिकर्मनिर्मित इव व्यतिष्ठत ।
गतमच्युतेन सह शून्यतां गतः
प्रतिपालयन्मन इवाङ्गनाजनः ॥
छन्दः
मञ्जुभाषिणी [१३: सजसजग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | कृ | त | स्व | स | द्म | ग | म | ना | द | रः | क्ष | णं |
| लि | पि | क | र्म | नि | र्मि | त | इ | व | व्य | ति | ष्ठ | त |
| ग | त | म | च्यु | ते | न | स | ह | शू | न्य | तां | ग | तः |
| प्र | ति | पा | ल | य | न्म | न | इ | वा | ङ्ग | ना | ज | नः |
| स | ज | स | ज | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.