इभकुम्भतुंङ्गकठिनेतरेतर-
स्तनभारदूरविनिवारितोदराः ।
परिफुल्लगण्डफलकाः परस्परं
परिरेभिरे कुकुरकौरवस्त्रियः ॥
इभकुम्भतुंङ्गकठिनेतरेतर-
स्तनभारदूरविनिवारितोदराः ।
परिफुल्लगण्डफलकाः परस्परं
परिरेभिरे कुकुरकौरवस्त्रियः ॥
स्तनभारदूरविनिवारितोदराः ।
परिफुल्लगण्डफलकाः परस्परं
परिरेभिरे कुकुरकौरवस्त्रियः ॥
मल्लिनाथः
इभेति ॥ इभकुम्भा इव ये तुङ्गाः कठिनाश्च इतरेतरासां स्तनभारास्तैर्दूरे विनिवारितान्यतिकार्यादस्फुटतया स्थापितान्युदराणि यासां ताः । `स्वाङ्गाच्च-` (४।१०५४) इति विकल्पादनीकारः । परिफुल्लगण्डफलकाः हर्षपुलकितगण्डस्थलाः कुकुरकौरवस्त्रियो यादवपाण्डवागनाः परस्परं परिरेभिर आश्लिष्टवत्यः । `परिरम्भः परिष्वङ्ग आश्लेष उपगूहनम्` इत्यमरः । परिफुल्लेति फुल्लतेः पचाद्यजन्तं न तु फलतेः निष्टान्तम् । अनुपसर्गादिति कथनविरोधात्
छन्दः
मञ्जुभाषिणी [१३: सजसजग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | भ | कु | म्भ | तुं | ङ्ग | क | ठि | ने | त | रे | त | र |
| स्त | न | भा | र | दू | र | वि | नि | वा | रि | तो | द | राः |
| प | रि | फु | ल्ल | ग | ण्ड | फ | ल | काः | प | र | स्प | रं |
| प | रि | रे | भि | रे | कु | कु | र | कौ | र | व | स्त्रि | यः |
| स | ज | स | ज | ग | ||||||||
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