यद्यदेव रुरुचे
रुचिरेभ्यः सुभ्रुवो रहसि त्तदकुर्व्-
अन् आनुकूलिकतया हि
नराणामाक्षिपन्ति हृदयानि तरुण्य्-
अः
यद्यदेव रुरुचे
रुचिरेभ्यः सुभ्रुवो रहसि त्तदकुर्व्-
अन् आनुकूलिकतया हि
नराणामाक्षिपन्ति हृदयानि तरुण्य्-
अः
रुचिरेभ्यः सुभ्रुवो रहसि त्तदकुर्व्-
अन् आनुकूलिकतया हि
नराणामाक्षिपन्ति हृदयानि तरुण्य्-
अः
छन्दः
आर्यागीतिः []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | द्य | दे | व | रु | रु | चे | रु | |||||
| चि | रे | भ्यः | सु | भ्रु | वो | र | ह | सि | त्त | द | कु | र्वन् |
| आ | नु | कू | लि | क | त | या | हि | न | ||||
| रा | णा | मा | क्षि | प | न्ति | हृ | द | या | नि | त | रु | ण्यः |
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