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अकरुणत्वमकारणविग्रहः
परधने परयोषिति च स्पृहा ।
सुजनबन्धुजनेष्वसहिष्णुता
प्रकृतिसिद्धमिदं हि दुरात्मनाम् ॥

अन्वयः AI अकरुणत्वम्, अकारण-विग्रहः, पर-धने पर-योषिति च स्पृहा, सुजन-बन्धु-जनेषु असहिष्णुता, इदम् हि दुरात्मनाम् प्रकृति-सिद्धम् (अस्ति)।
Summary AI Cruelty, causeless conflict, desire for others' wealth and women, and intolerance towards good people and relatives—these traits are indeed innate to the wicked.
सारांश AI निर्दयता, बिना कारण विवाद, पराए धन और पराई स्त्री की इच्छा तथा सज्जनों और बंधु-बांधवों के प्रति ईर्ष्या—ये दुष्टों के जन्मजात और स्वाभाविक लक्षण हैं।
पदच्छेदः AI
अकरुणत्वम्अकरुणत्व (१.१) Cruelty
अकारण-विग्रहःअकारणविग्रह (१.१) causeless conflict
पर-धनेपरधन (७.१) for another's wealth
पर-योषितिपरयोषित् (७.१) for another's wife
and
स्पृहास्पृहा (१.१) desire
सुजन-बन्धु-जनेषुसुजनबन्धुजन (७.३) towards good people and relatives
असहिष्णुताअसहिष्णुता (१.१) intolerance
प्रकृति-सिद्धम्प्रकृतिसिद्ध (१.१) is innate
इदम्इदम् (१.१) this
हिहि indeed
दुरात्मनाम्दुरात्मन् (६.३) of the wicked
छन्दः द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
रु त्व का वि ग्र हः
ने यो षि ति स्पृ हा
सु न्धु ने ष्व हि ष्णु ता
प्र कृ ति सि द्ध मि दं हि दु रा त्म नाम्
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