प्रसह्य मणिमुद्धरेन्मकरवक्त्रदंष्ट्रान्तरा-
त्समुद्रमपि सन्तरेत्प्रचलदूर्मिमालाकुलम् ।
भुजङ्गमपि कोपितं शिरसि पुष्पवद्धारये-
त्न तु प्रतिनिविष्टमूर्खजनचित्तमाराधयेत् ॥

अन्वयः AI (नरः) मकर-वक्त्र-दंष्ट्र-अन्तरात् प्रसह्य मणिम् उद्धरेत्, प्रचलत्-ऊर्मि-माला-आकुलम् समुद्रम् अपि सन्तरेत्, कोपितम् भुजङ्गम् अपि शिरसि पुष्पवत् धारयेत्, तु प्रतिनिविष्ट-मूर्ख-जन-चित्तम् न आराधयेत् ।
Summary AI One might forcibly extract a gem from between a crocodile's fangs, cross an ocean agitated by rows of surging waves, and even wear an enraged serpent on one's head like a flower. But one can never please the mind of a stubborn fool.
सारांश AI व्यक्ति मगरमच्छ के जबड़े से मणि निकाल सकता है, अशांत समुद्र को पार कर सकता है और क्रोधित सर्प को माला की तरह धारण कर सकता है, परंतु हठ करने वाले मूर्ख के मन को नहीं जीत सकता।
पदच्छेदः AI
प्रसह्यप्रसह्य (प्र√सह्+ल्यप्) by force
मणिम्मणि (२.१) a gem
उद्धरेत्उद्धरेत् (उद्√हृ कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) one might extract
मकरमकर crocodile's
वक्त्रवक्त्र mouth's
दंष्ट्रदंष्ट्रा fangs'
अन्तरात्अन्तर (५.१) from between
समुद्रम्समुद्र (२.१) the ocean
अपिअपि even
सन्तरेत्सन्तरेत् (सम्√तृ कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) one might cross
प्रचलत्प्रचलत् (प्र√चल्+शतृ) moving
ऊर्मिऊर्मि waves'
मालामाला rows
आकुलम्आकुल (२.१) agitated with
भुजङ्गम्भुजङ्ग (२.१) a serpent
अपिअपि even
कोपितम्कोपित (√कुप्+णिच्+क्त, २.१) enraged
शिरसिशिरस् (७.१) on the head
पुष्पवत्पुष्पवत् like a flower
धारयेत्धारयेत् (√धृ +णिच् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) one might wear
not
तुतु but
प्रतिनिविष्टप्रतिनिविष्ट (प्रति+नि√विश्+क्त) stubborn
मूर्खमूर्ख foolish
जनजन person's
चित्तम्चित्त (२.१) mind
आराधयेत्आराधयेत् (आ√राध् +णिच् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) one could please
छन्दः पृथ्वी [१७: जसजसयलग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७
प्र ह्य णि मु द्ध रे न्म क्त्र दं ष्ट्रा न्त रा
त्स मु द्र पि न्त रे त्प्र दू र्मि मा ला कु लम्
भु ङ्ग पि को पि तं शि सि पु ष्प द्धा ये
त्न तु प्र ति नि वि ष्ट मू र्ख चि त्त मा रा येत्
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