अन्वयः
AI
बोद्धारः मत्सर-ग्रस्ताः (सन्ति) । प्रभवः स्मय-दूषिताः (सन्ति) । अन्ये च अबोध-उपहताः (सन्ति) । (अतः) सुभाषितम् अङ्गे जीर्णम् ।
Summary
AI
The learned are consumed by envy, the powerful are corrupted by pride, and others are afflicted with ignorance. Thus, wise sayings perish within oneself, finding no worthy recipient.
सारांश
AI
विद्वान ईर्ष्या से ग्रस्त हैं, शासक अहंकार में चूर हैं और अन्य लोग अज्ञान के अंधकार में डूबे हैं, इसलिए सुभाषित वचन मेरे शरीर के भीतर ही पुराने हो गए।
पदच्छेदः
AI
| बोद्धारः | बोद्धृ (१.३) | The learned |
| मत्सर | मत्सर | envy |
| ग्रस्ताः | ग्रस्त (√ग्रस्+क्त, १.३) | are seized by |
| प्रभवः | प्रभु (१.३) | the powerful |
| स्मय | स्मय | pride |
| दूषिताः | दूषित (√दुष्+णिच्+क्त, १.३) | are corrupted by |
| अबोध | अबोध | ignorance |
| उपहताः | उपहत (उप√हन्+क्त, १.३) | are afflicted by |
| च | च | and |
| अन्ये | अन्य (१.३) | others |
| जीर्णम् | जीर्ण (√जॄ+क्त, १.१) | has decayed |
| अङ्गे | अङ्ग (७.१) | within the body (of the speaker) |
| सुभाषितम् | सुभाषित (१.१) | A wise saying |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| बो | द्धा | रो | म | त्स | र | ग्र | स्ताः |
| प्र | भ | वः | स्म | य | दू | षि | ताः |
| अ | बो | धो | प | ह | ताः | चा | न्ये |
| जी | र्ण | म | ङ्गे | सु | भा | षि | तम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.