शैलानामवरोहतीव शिखरादुन्मज्जतां मेदिनी
पर्णाभ्यन्तरलीनतां विजहति स्कन्धोदयात्पादपाः ।
संतानैस्तनुभावनष्टसलिला व्यक्तिं भजन्त्यापगाः
केनाप्युत्क्षिपतेव पष्य भुवनं मत्पार्श्वमानीयते ॥
शैलानामवरोहतीव शिखरादुन्मज्जतां मेदिनी
पर्णाभ्यन्तरलीनतां विजहति स्कन्धोदयात्पादपाः ।
संतानैस्तनुभावनष्टसलिला व्यक्तिं भजन्त्यापगाः
केनाप्युत्क्षिपतेव पष्य भुवनं मत्पार्श्वमानीयते ॥
पर्णाभ्यन्तरलीनतां विजहति स्कन्धोदयात्पादपाः ।
संतानैस्तनुभावनष्टसलिला व्यक्तिं भजन्त्यापगाः
केनाप्युत्क्षिपतेव पष्य भुवनं मत्पार्श्वमानीयते ॥
अन्वयः
AI
पश्य, उन्मज्जताम् शैलानाम् शिखरात् मेदिनी अवरोहति इव । पादपाः स्कन्धोदयात् पर्णाभ्यन्तरलीनताम् विजहति । तनुभावनष्टसलिलाः आपगाः संतानैः व्यक्तिम् भजन्ति । केन अपि उत्क्षिपता इव भुवनम् मत्पार्श्वम् आनीयते ।
Summary
AI
Look! The earth seems to descend from the peaks of emerging mountains. Trees, as their trunks appear, lose their state of being hidden among leaves. Rivers, whose waters were invisible due to their thinness, now become visible by their expanse. It is as if the world is being thrown upwards and brought near me.
पदच्छेदः
AI
| शैलानाम् | शैल (६.३) | of the mountains |
| अवरोहति | अवरोहति (अव√रुह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is descending |
| इव | इव | as if |
| शिखरात् | शिखर (५.१) | from the peaks |
| उन्मज्जताम् | उन्मज्जत् (उद्√मस्ज्+शतृ, ६.३) | emerging |
| मेदिनी | मेदिनी (१.१) | the earth |
| पर्णाभ्यन्तरलीनताम् | पर्ण–अभ्यन्तर–लीनता (२.१) | the state of being hidden within leaves |
| विजहति | विजहति (वि√हा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | abandon |
| स्कन्धोदयात् | स्कन्ध–उदय (५.१) | from the appearance of their trunks |
| पादपाः | पादप (१.३) | the trees |
| संतानैः | संतान (३.३) | by their expanse |
| तनुभावनष्टसलिला | तनुभाव–नष्ट–सलिल (१.३) | whose waters were lost due to their thinness |
| व्यक्तिम् | व्यक्ति (२.१) | visibility |
| भजन्ति | भजन्ति (√भज् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | attain |
| आपगाः | आपगा (१.३) | rivers |
| केन | किम् (३.१) | by someone |
| अपि | अपि | as it were |
| उत्क्षिपता | उत्क्षिपत् (उद्√क्षिप्+शतृ, ३.१) | throwing up |
| इव | इव | as if |
| पश्य | पश्य (√दृश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | Look |
| भुवनम् | भुवन (२.१) | the world |
| मत्पार्श्वम् | मद्–पार्श्व (२.१) | to my side |
| आनीयते | आनीयते (आ√नी भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is being brought |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शै | ला | ना | म | व | रो | ह | ती | व | शि | ख | रा | दु | न्म | ज्ज | तां | मे | दि | नी |
| प | र्णा | भ्य | न्त | र | ली | न | तां | वि | ज | ह | ति | स्क | न्धो | द | या | त्पा | द | पाः |
| सं | ता | नै | स्त | नु | भा | व | न | ष्ट | स | लि | ला | व्य | क्तिं | भ | ज | न्त्या | प | गाः |
| के | ना | प्यु | त्क्षि | प | ते | व | प | ष्य | भु | व | नं | म | त्पा | र्श्व | मा | नी | य | ते |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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