अद्य अपि नूनं हरकोपवह्निन-
स्त्वयि ज्वलत्यौर्व इवाम्बुराशौ ।
त्वमन्यथा मन्मथ मद्विधानां
भस्मावशेषः कथमित्थमुष्णः ॥
अद्य अपि नूनं हरकोपवह्निन-
स्त्वयि ज्वलत्यौर्व इवाम्बुराशौ ।
त्वमन्यथा मन्मथ मद्विधानां
भस्मावशेषः कथमित्थमुष्णः ॥
स्त्वयि ज्वलत्यौर्व इवाम्बुराशौ ।
त्वमन्यथा मन्मथ मद्विधानां
भस्मावशेषः कथमित्थमुष्णः ॥
अन्वयः
AI
(हे मन्मथ) तव कुसुमशरत्वम् इन्दोः शीतरश्मित्वम् इदम् द्वयम् मद्विधेषु अयथार्थम् दृश्यते। इन्दुः हिमगर्भैः मयूखैः अग्निम् विसृजति। त्वम् अपि कुसुमबाणान् वज्रसारीकरोषि।
Summary
AI
O God of Love, your nature of having flower-arrows and the moon's nature of having cool rays—both these seem untrue for people like me. The moon releases fire with its frost-cored rays, and you too make your flower-arrows as hard as thunderbolts.
पदच्छेदः
AI
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| कुसुमशरत्वम् | कुसुम–शर–त्व (१.१) | state of having flower-arrows |
| शीतरश्मित्वम् | शीत–रश्मि–त्व (१.१) | state of having cool rays |
| इन्दोः | इन्दु (६.१) | of the moon |
| द्वयम् | द्वय (१.१) | pair |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| अयथार्थम् | अयथार्थ (१.१) | untrue |
| दृश्यते | दृश्यते (√दृश् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is seen |
| मद्विधेषु | मद्–विध (७.३) | in people like me |
| विसृजति | विसृजति (वि√सृज् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | releases |
| हिमगर्भैः | हिम–गर्भ (३.३) | with frost in their core |
| अग्निम् | अग्नि (२.१) | fire |
| इन्दुः | इन्दु (१.१) | the moon |
| मयूखैः | मयूख (३.३) | with rays |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| अपि | अपि | also |
| कुसुमबाणान् | कुसुम–बाण (२.३) | flower-arrows |
| वज्रसारीकरोषि | वज्रसारीकरोषि (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you make as hard as thunderbolts |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | द्य | अ | पि | नू | नं | ह | र | को | प | व | ह्नि | न |
| स्त्व | यि | ज्व | ल | त्यौ | र्व | इ | वा | म्बु | रा | शौ | ||
| त्व | म | न्य | था | म | न्म | थ | म | द्वि | धा | नां | ||
| भ | स्मा | व | शे | षः | क | थ | मि | त्थ | मु | ष्णः | ||
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.