या सृष्टिः स्रष्टुराद्या वहति विधिहुतं या हविर्या च होत्री
ये द्वे कालं विधत्तः श्रुतिविषयगुणा या स्थिता व्याप्य विश्वम् ।
यामाहुः सर्वबीजप्रकृतिरिति यया प्राणिनः प्राणवन्तः
प्रत्यक्षाभिः प्रपन्नस्तनुभिरवतु वस्ताभिरष्टाभिरीशः ॥
या सृष्टिः स्रष्टुराद्या वहति विधिहुतं या हविर्या च होत्री
ये द्वे कालं विधत्तः श्रुतिविषयगुणा या स्थिता व्याप्य विश्वम् ।
यामाहुः सर्वबीजप्रकृतिरिति यया प्राणिनः प्राणवन्तः
प्रत्यक्षाभिः प्रपन्नस्तनुभिरवतु वस्ताभिरष्टाभिरीशः ॥
ये द्वे कालं विधत्तः श्रुतिविषयगुणा या स्थिता व्याप्य विश्वम् ।
यामाहुः सर्वबीजप्रकृतिरिति यया प्राणिनः प्राणवन्तः
प्रत्यक्षाभिः प्रपन्नस्तनुभिरवतु वस्ताभिरष्टाभिरीशः ॥
अन्वयः
AI
या स्रष्टुः आद्या सृष्टिः, या विधिहुतं हविः वहति, या च होत्री, ये द्वे कालं विधत्तः, या श्रुतिविषयगुणा विश्वं व्याप्य स्थिता, यां सर्वबीजप्रकृतिः इति आहुः, यया प्राणिनः प्राणवन्तः, सः ईशः ताभिः प्रत्यक्षाभिः अष्टाभिः तनुभिः प्रपन्नः सन् वः अवतु।
Summary
AI
May Lord Shiva protect you, manifest in his eight visible forms: water (the first creation), fire (carrier of oblations), the sacrificer, the sun and moon (regulators of time), ether (pervading the universe), earth (source of all seeds), and air (which animates all beings).
पदच्छेदः
AI
| या | यद् (१.१) | She who is |
| सृष्टिः | सृष्टि (१.१) | the creation |
| स्रष्टुः | स्रष्टृ (६.१) | of the creator |
| आद्या | आद्या (१.१) | the first |
| वहति | वहति (√वह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | carries |
| विधिहुतम् | विधि–हुत (√हु+क्त, २.१) | the oblation offered according to rites |
| या | यद् (१.१) | she who is |
| हविः | हविस् (१.१) | the oblation (fire) |
| या | यद् (१.१) | she who is |
| च | च | and |
| होत्री | होत्री (१.१) | the sacrificer |
| ये | यद् (१.२) | the two which |
| द्वे | द्वि (१.२) | two |
| कालम् | काल (२.१) | time |
| विधत्तः | विधत्तः (वि√धा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | regulate |
| श्रुतिविषयगुणा | श्रुति–विषय–गुण (१.१) | she whose quality is the object of hearing (sound) |
| या | यद् (१.१) | she who |
| स्थिता | स्थिता (√स्था+क्त, १.१) | stands |
| व्याप्य | व्याप्य (वि√आप्+ल्यप्) | having pervaded |
| विश्वम् | विश्व (२.१) | the universe |
| याम् | यद् (२.१) | whom |
| आहुः | आहुः (√अह् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they call |
| सर्वबीजप्रकृतिः | सर्व–बीज–प्रकृति (१.१) | the source of all seeds |
| इति | इति | thus |
| यया | यद् (३.१) | by which |
| प्राणिनः | प्राणिन् (१.३) | living beings |
| प्राणवन्तः | प्राणवत् (१.३) | are animate |
| प्रत्यक्षाभिः | प्रत्यक्ष (३.३) | with the visible |
| प्रपन्नः | प्रपन्न (प्र√पद्+क्त, १.१) | endowed with |
| तनुभिः | तनु (३.३) | forms |
| अवतु | अवतु (√अव् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may he protect |
| वः | युष्मद् (२.३) | you |
| ताभिः | तद् (३.३) | with those |
| अष्टाभिः | अष्टन् (३.३) | eight |
| ईशः | ईश (१.१) | the Lord |
छन्दः
स्रग्धरा [२१: मरभनययय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ | २० | २१ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| या | सृ | ष्टिः | स्र | ष्टु | रा | द्या | व | ह | ति | वि | धि | हु | तं | या | ह | वि | र्या | च | हो | त्री |
| ये | द्वे | का | लं | वि | ध | त्तः | श्रु | ति | वि | ष | य | गु | णा | या | स्थि | ता | व्या | प्य | वि | श्वम् |
| या | मा | हुः | स | र्व | बी | ज | प्र | कृ | ति | रि | ति | य | या | प्रा | णि | नः | प्रा | ण | व | न्तः |
| प्र | त्य | क्षा | भिः | प्र | प | न्न | स्त | नु | भि | र | व | तु | व | स्ता | भि | र | ष्टा | भि | री | शः |
| म | र | भ | न | य | य | य | ||||||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.