तं भावार्थं प्रसवसमयाकाङ्क्षिणीनां प्रजाना
मन्तर्गूढं क्षितिरिव नभोबीजमुष्टिं दधाना ।
मौलैः सार्धं स्थविरसचिवैर्हेमसिंहासनस्था
राज्ञी राज्यं विधिवदशिषद्भर्तुरव्याहताज्ञा ॥
तं भावार्थं प्रसवसमयाकाङ्क्षिणीनां प्रजाना
मन्तर्गूढं क्षितिरिव नभोबीजमुष्टिं दधाना ।
मौलैः सार्धं स्थविरसचिवैर्हेमसिंहासनस्था
राज्ञी राज्यं विधिवदशिषद्भर्तुरव्याहताज्ञा ॥
मन्तर्गूढं क्षितिरिव नभोबीजमुष्टिं दधाना ।
मौलैः सार्धं स्थविरसचिवैर्हेमसिंहासनस्था
राज्ञी राज्यं विधिवदशिषद्भर्तुरव्याहताज्ञा ॥
अन्वयः
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प्रसव-समय-आकाङ्क्षिणीनाम् प्रजानाम् भाव-अर्थम्, अन्तः-गूढम् नभः-बीज-मुष्टिम् क्षितिः इव, तम् (गर्भम्) दधाना, हेम-सिंहासन-स्था, भर्तुः अव्याहत-आज्ञा राज्ञी मौलैः स्थविर-सचिवैः सार्धम् राज्यम् विधिवत् अशिषत् ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
तमिति॥ प्रसवो गर्भमोचनम्। फलं च विवक्षितम्।
स्यादुत्पादे फले पुष्पे प्रसवो गर्भमोचने इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.२१९ ) । तस्य यः समयस्तदाकाङ्क्षिणीनां प्रजानां भावार्थं भावाय। भूतय इत्यर्थः। भावो लीलाक्रियाचेष्टाभूत्यभिप्रायजन्तुषु इति यादवः। क्षितिरन्दर्गूढं नभोबीजमुष्टिमिव। श्रवणमास्युप्तं बीजमुष्टिं यथा-धत्ते तद्विदित्यर्थः। मुष्टि शब्दो द्विलिङ्गः। अक्लीबौ मुष्टिमुस्तकौ इति यादवः। अन्तर्गूढमन्तर्गतं गर्भं दधाना हेमसिंहासनस्थाऽव्याहताज्ञा राज्ञी मौलैर्मूले भवैर्मूलादागतैर्वा। आप्तैरित्यर्थः। स्थिविरसचिवैर्बृद्धामात्यैः। सार्धं भर्तू राज्यं विधिवद्विष्यर्हम्। यथाशास्त्रमित्यर्थः। अर्हार्थे वतिप्रत्ययः। अशिषच्छास्ति स्म। सर्तिशास्त्यर्तिभ्यश्च (अष्टाध्यायी ३.१.७६ ) इति च्लेरङ्। शासइदङ्हलोः` (अष्टाध्यायी ६.४.३४ ) इतीकारः ॥
Summary
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Bearing that future hope (the fetus) for the subjects who were eagerly awaiting the time of delivery—much like the earth holds a handful of celestial seeds hidden within—the queen, seated on the golden throne, her commands as unopposed as her husband's, ruled the kingdom according to tradition, along with the hereditary and aged ministers.
सारांश
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भावी संतान की प्रतीक्षा कर रही प्रजा के लिए रानी ने अनुभवी मंत्रियों की सहायता से स्वर्ण सिंहासन पर बैठकर निष्कंटक शासन किया और राजा की आज्ञा का निर्वाह किया।
पदच्छेदः
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| तम् | तद् (२.१) | that |
| भावार्थम् | भाविन्–अर्थ (२.१) | future object/hope |
| प्रसवसमयाकाङ्क्षिणीनाम् | प्रसव–समय–आकाङ्क्षिणी (६.३) | of those who were eagerly awaiting the time of delivery |
| प्रजानाम् | प्रजा (६.३) | of the subjects |
| अन्तर्गूढम् | अन्तर्–गूढ (२.१) | hidden within |
| क्षितिः | क्षिति (१.१) | the earth |
| इव | इव | like |
| नभोबीजमुष्टिम् | नभस्–बीज–मुष्टि (२.१) | a handful of celestial seeds |
| दधाना | दधान (√धा+शानच्, १.१) | bearing |
| मौलैः | मौल (३.३) | with hereditary |
| सार्धम् | सार्धम् | with |
| स्थविरसचिवैः | स्थविर–सचिव (३.३) | with aged ministers |
| हेमसिंहासनस्था | हेमन्–सिंहासन–स्था (१.१) | seated on the golden throne |
| राज्ञी | राज्ञी (१.१) | the queen |
| राज्यम् | राज्य (२.१) | the kingdom |
| विधिवत् | विधिवत् | according to tradition |
| अशिषत् | अशिषत् (√शास् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | ruled |
| भर्तुः | भर्तृ (६.१) | of her husband |
| अव्याहताज्ञा | अव्याहत–आज्ञा (१.१) | whose command was unopposed |
छन्दः
मन्दाक्रान्ता [१७: मभनततगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तं | भा | वा | र्थं | प्र | स | व | स | म | या | का | ङ्क्षि | णी | नां | प्र | जा | ना |
| म | न्त | र्गू | ढं | क्षि | ति | रि | व | न | भो | बी | ज | मु | ष्टिं | द | धा | ना |
| मौ | लैः | सा | र्धं | स्थ | वि | र | स | चि | वै | र्हे | म | सिं | हा | स | न | स्था |
| रा | ज्ञी | रा | ज्यं | वि | धि | व | द | शि | ष | द्भ | र्तु | र | व्या | ह | ता | ज्ञा |
| म | भ | न | त | त | ग | ग | ||||||||||
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