आराध्य विश्वेश्वरमीश्वरेण तेन क्षितेर्विश्वसहो विजज्ञे । पातुं सहो विशअवसखः समग्रां विशअवंभरामात्मजमूर्तिरात्मा ॥
आराध्य विश्वेश्वरमीश्वरेण तेन क्षितेर्विश्वसहो विजज्ञे । पातुं सहो विशअवसखः समग्रां विशअवंभरामात्मजमूर्तिरात्मा ॥
अन्वयः
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तेन ईश्वरेण विश्वेश्वरम् आराध्य, क्षितेः विश्वसहः विजज्ञे । विश्व-सखः आत्मज-मूर्तिः आत्मा (सः) समग्राम् विश्वंभराम् पातुम् सहः (अभवत्) ।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
आराध्येति॥ तेन क्षितेरीश्वरेण व्यषिताश्वेन विश्वेश्वरं काशीपतिमाराध्योपास्य विश्वसहो नाम विश्वसखः समग्रां सर्वां विश्वंभरां भुवं पातुं रक्षितुं सहत इति सहः क्षमः। पचाद्यच्। आत्मजमूर्तिः पुत्ररूप्यात्मा स्वयमेव।
आत्मा वै पुत्रनामासि(आश्व.सू.१।१५) इति श्रुतेः। विजज्ञे सुषुवे। विपूर्वो जनिर्गर्भविमोचने वर्तते। यथाह भगवान्पाणिनिः-समां समां विजायते इति ॥
Summary
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By that king (Vyushitashva), having worshipped Lord Shiva, Vishvasaha was born as the lord of the earth. That soul, appearing in the form of a son and a friend to all, was capable of protecting the entire world.
सारांश
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भगवान विश्वेश्वर की आराधना से राजा व्युषिताश्व को विश्वसह नामक पुत्र प्राप्त हुआ, जो सम्पूर्ण पृथ्वी की रक्षा में समर्थ और पिता का ही प्रतिरूप था।
पदच्छेदः
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| आराध्य | आराध्य (आ√राध्+ल्यप्) | Having worshipped |
| विश्वेश्वरम् | विश्व–ईश्वर (२.१) | the Lord of the Universe (Shiva) |
| ईश्वरेण | ईश्वर (३.१) | by the king |
| तेन | तद् (३.१) | by that |
| क्षितेः | क्षिति (६.१) | of the earth |
| विश्वसहः | विश्वसह (१.१) | Vishvasaha |
| विजज्ञे | विजज्ञे (वि√जन् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was born |
| पातुम् | पातुम् (√पा+तुमुन्) | to protect |
| सहः | सह (१.१) | capable |
| विश्वसखः | विश्व–सखि (१.१) | a friend to the universe |
| समग्राम् | समग्र (२.१) | the entire |
| विश्वंभराम् | विश्वंभरा (२.१) | earth |
| आत्मजमूर्तिः | आत्मज–मूर्ति (१.१) | in the form of a son |
| आत्मा | आत्मन् (१.१) | the soul |
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