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क्षीणः श्रयति शशी रविम् ऋद्धो वर्धयति पयसां नाथम् ।
अन्ये विपदि सहाया धनिनां श्रियमनुभवन्त्यन्ये ॥

अन्वयः AI क्षीणः शशी रविम् श्रयति ऋद्धः शशी पयसाम् नाथम् वर्धयति । अन्ये विपदि सहायाः धनिनाम् श्रियम् अन्ये अनुभवन्ति ।
Summary AI The waning moon seeks refuge in the sun, while the waxing moon causes the lord of the waters to swell. Some are companions in adversity, while others merely enjoy the wealth of the rich.
सारांश AI क्षीण होने पर चंद्रमा सूर्य का आश्रय लेता है और समृद्ध होने पर समुद्र को बढ़ाता है। कुछ लोग विपत्ति में सहायक होते हैं, तो कुछ केवल वैभव का भोग करते हैं।
पदच्छेदः AI
क्षीणःक्षीण (१.१) waning
श्रयतिश्रयति (√श्रि कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) approaches
शशीशशिन् (१.१) the moon
रविम्रवि (२.१) the sun
ऋद्धोऋद्ध (१.१) waxing
वर्धयतिवर्धयति (√वृध् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) increases
पयसाम्पयस् (६.३) of waters
नाथम्नाथ (२.१) the lord
अन्येअन्य (१.३) some others
विपदिविपद् (७.१) in adversity
सहायासहाय (१.३) helpers
धनिनाम्धनिन् (६.३) of the wealthy
श्रियम्श्री (२.१) prosperity
अनुभवन्तिअनुभवन्ति (अनु√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) experience/enjoy
अन्येअन्य (१.३) others
छन्दः आर्या []
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
क्षी णः श्र ति शी
वि मृ द्धो र्ध ति सां ना थम्
न्ये वि दि हा या
नि नां श्रि नु न्त्य न्ये
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