अन्वयः
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शास्त्रेषु कुशलाः अपि लोकाचार-विवर्जिताः सर्वे ते हास्यताम् यान्ति यथा ते मूर्ख-पण्डिताः ॥
Summary
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Even those proficient in the scriptures, if devoid of common sense and social conduct, become objects of ridicule, just like those foolish scholars.
सारांश
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शास्त्रों में कुशल होने पर भी जो लोग व्यावहारिक बुद्धि से रहित होते हैं, वे उन मूर्ख विद्वानों की तरह उपहास के पात्र बनते हैं।
पदच्छेदः
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| अपि | अपि | even |
| शास्त्रेषु | शास्त्र (७.३) | in scriptures |
| कुशलाः | कुशल (१.३) | skilled |
| लोकाचारविवर्जिताः | लोकाचारविवर्जित (१.३) | devoid of worldly conduct |
| सर्वे | सर्व (१.३) | all |
| ते | तद् (१.३) | they |
| हास्यताम् | हास्यता (२.१) | ridiculousness |
| यान्ति | यान्ति (√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | go/become |
| यथा | यथा | just as |
| ते | तद् (१.३) | those |
| मूर्खपण्डिताः | मूर्खपण्डित (१.३) | foolish scholars |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | पि | शा | स्त्रे | षु | कु | श | ला |
| लो | का | चा | र | वि | व | र्जि | ताः |
| स | र्वे | ते | हा | स्य | तां | या | न्ति |
| य | था | ते | मू | र्ख | प | ण्डि | ताः |
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