अन्वयः
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तया लक्ष्म्या किम् क्रियते या केवला वधूः इव (भवति) या पथिकैः वेश्या इव सामान्या न उपभुज्यते ॥
Summary
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What is the use of that wealth which is kept private like a bride and is not shared with others like a common courtesan for public benefit?
सारांश
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उस लक्ष्मी का क्या लाभ जो वधू की तरह केवल घर में सीमित रहे? लक्ष्मी तो वेश्या की भांति सार्वजनिक होनी चाहिए जिसका लाभ सभी पथिक उठा सकें।
पदच्छेदः
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| किम् | किम् | what |
| तया | तद् (३.१) | by that |
| क्रियते | क्रियते (√कृ भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is done |
| लक्ष्म्या | लक्ष्मी (३.१) | by wealth |
| या | यद् (१.१) | which |
| वधूः | वधू (१.१) | a bride |
| इव | इव | like |
| केवला | केवल (१.१) | exclusive |
| या | यद् (१.१) | which |
| न | न | not |
| वेश्या | वेश्या (१.१) | a courtesan |
| इव | इव | like |
| सामान्या | सामान्य (१.१) | common |
| पथिकैः | पथिक (३.३) | by travelers |
| उपभुज्यते | उपभुज्यते (उप√भुज् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is enjoyed |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| किं | त | या | क्रि | य | ते | ल | क्ष्म्या |
| या | व | धू | रि | व | के | व | ला |
| या | न | वे | श्ये | व | सा | मा | न्या |
| प | थि | कै | रु | प | भु | ज्य | ते |
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