प्रत्यक्षेऽपि कृते पापे मूर्खः साम्ना प्रशाम्यति ।
रथकारः स्वकां भार्यां सजारां शिरसावहत् ॥

अन्वयः AI प्रत्यक्षे पापे कृते अपि मूर्खः साम्ना प्रशाम्यति, रथ-कारः स्वकां स-जारां भार्यां शिरसा अवहत् ।
Summary AI Even when a sin is committed openly, a fool is pacified by sweet words; the carpenter carried his own wife, along with her lover, on his head.
सारांश AI प्रत्यक्ष पाप होने पर भी मूर्ख व्यक्ति मीठी बातों से शांत हो जाता है, जैसे रथकार ने अपनी कुलटा पत्नी को प्रेमवश सिर पर ढोया।
पदच्छेदः AI
प्रत्यक्षेप्रत्यक्ष (७.१) in plain sight
अपिअपि even
कृतेकृत (√कृ+क्त, ७.१) done
पापेपाप (७.१) sin/wrongdoing
मूर्खःमूर्ख (१.१) a fool
साम्नासामन् (३.१) by conciliation/gentle words
प्रशाम्यतिप्रशाम्यति (प्र√शम् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) becomes pacified
रथकारःरथकार (१.१) the chariot-maker
स्वकाम्स्वक (२.१) his own
भार्याम्भार्या (२.१) wife
सजाराम्जार (२.१) with her paramour
शिरसाशिरस् (३.१) on his head
अवहत्अवहत् (√वह् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) carried
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
प्र त्य क्षे ऽपि कृ ते पा पे
मू र्खः सा म्ना प्र शा म्य ति
का रः स्व कां भा र्यां
जा रां शि सा हत्
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