अन्वयः
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प्राज्ञः अपमानं पुरस्कृत्य तु मानं पृष्ठतः कृत्वा स्वार्थम् अभ्युद्धरेत्, हि कार्य-ध्वंसः मूर्खता ।
Summary
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A wise person should secure his interests by prioritizing the goal over pride, even accepting insults; for the failure to complete one's task is true foolishness.
सारांश
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बुद्धिमान व्यक्ति को मान-अपमान की चिंता छोड़कर अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहिए, क्योंकि कार्य का बिगड़ना ही मूर्खता है।
पदच्छेदः
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| अपमानम् | अपमान (२.१) | undefined |
| पुरस्कृत्य | पुरस्कृत्य (पुरस्√कृ+ल्यप्) | undefined |
| मानम् | मान (२.१) | undefined |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ+क्त्वा) | undefined |
| तु | तु | undefined |
| पृष्ठतः | पृष्ठतः | undefined |
| स्वार्थम् | स्वार्थ (२.१) | undefined |
| अभ्युद्धरेत् | अभ्युद्धरेत् (अभि+उत्√हृ कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | undefined |
| प्राज्ञः | प्राज्ञ (१.१) | undefined |
| कार्य-ध्वंसः | कार्य–ध्वंस (१.१) | undefined |
| हि | हि | undefined |
| मूर्खता | मूर्खता (१.१) | undefined |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | प | मा | नं | पु | र | स्कृ | त्य |
| मा | नं | कृ | त्वा | तु | पृ | ष्ठ | तः |
| स्वा | र्थ | म | भ्यु | द्ध | रे | त्प्रा | ज्ञः |
| का | र्य | ध्वं | सो | हि | मू | र्ख | ता |
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