अन्वयः
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दरिद्रस्य सन्तः अपि इतरे गुणाः न हि राजन्ते भूतानाम् आदित्यः इव श्रीः गुणानां प्रकाशिनी ।
Summary
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Even existing virtues of a poor man do not shine; for wealth (śrī) is the illuminator of qualities, just as the sun is for all living beings.
सारांश
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दरिद्र व्यक्ति के अच्छे गुण भी समाज में शोभा नहीं पाते, क्योंकि धन ही मानवीय गुणों को वैसे ही प्रकाशित करता है जैसे सूर्य प्राणियों को।
पदच्छेदः
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| सन्तः | सत् (१.३) | undefined |
| अपि | अपि | undefined |
| न | न | undefined |
| हि | हि | undefined |
| राजन्ते | राजन्ते (√राज् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | undefined |
| दरिद्रस्य | दरिद्र (६.१) | undefined |
| इतरे | इतर (१.३) | undefined |
| गुणाः | गुण (१.३) | undefined |
| आदित्यः | आदित्य (१.१) | undefined |
| इव | इव | undefined |
| भूतानां | भूत (६.३) | undefined |
| श्रीः | श्री (१.१) | undefined |
| गुणानां | गुण (६.३) | undefined |
| प्रकाशिनी | प्रकाशिन् (१.१) | undefined |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | न्तो | ऽपि | न | हि | रा | ज | न्ते |
| द | रि | द्र | स्ये | त | रे | गु | णाः |
| आ | दि | त्य | इ | व | भू | ता | नां |
| श्री | र्गु | णा | नां | प्र | का | शि | नी |
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