अतीतलाभस्य सुरक्षणार्थं
भविष्यलाभस्य च सङ्गमार्थम् ।
आपत्प्रपन्नस्य च मोक्षणार्थं
यन्मन्त्र्यतेऽसौ परमो हि मन्त्रः ॥
अतीतलाभस्य सुरक्षणार्थं
भविष्यलाभस्य च सङ्गमार्थम् ।
आपत्प्रपन्नस्य च मोक्षणार्थं
यन्मन्त्र्यतेऽसौ परमो हि मन्त्रः ॥
भविष्यलाभस्य च सङ्गमार्थम् ।
आपत्प्रपन्नस्य च मोक्षणार्थं
यन्मन्त्र्यतेऽसौ परमो हि मन्त्रः ॥
अन्वयः
AI
अतीत-लाभस्य सु-रक्षण-अर्थम् च भविष्य-लाभस्य सङ्गम-अर्थम् च आपत्-प्रपन्नस्य मोक्षण-अर्थम् यत् मन्त्र्यते, असौ हि परमः मन्त्रः।
Summary
AI
That counsel which is deliberated for the protection of past gains, the acquisition of future gains, and the liberation of one fallen into calamity is indeed the supreme counsel.
सारांश
AI
पुराने लाभ की रक्षा, नए लाभ की प्राप्ति और संकट से मुक्ति के लिए किया गया सार्थक विचार ही श्रेष्ठ मंत्र है।
पदच्छेदः
AI
| अतीत-लाभस्य | अतीत–लाभ (६.१) | of past gain |
| सुरक्षणार्थं | सुरक्षण (४.१) | for the sake of good protection |
| भविष्य-लाभस्य | भविष्य–लाभ (६.१) | of future gain |
| च | च | undefined |
| सङ्गमार्थम् | सङ्गम (४.१) | for the sake of acquisition |
| आपत्-प्रपन्नस्य | आपद्–प्रपन्न (६.१) | of one fallen into calamity |
| च | च | undefined |
| मोक्षणार्थं | मोक्षण (४.१) | for the sake of liberation |
| यन्मन्त्र्यतेऽसौ | यद् (१.१)–मन्त्र्यते (√मन्त्र् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.)–अदस् (१.१) | that which is counselled, that |
| परमो | परम (१.१) | undefined |
| हि | हि | undefined |
| मन्त्रः | मन्त्र (१.१) | undefined |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ती | त | ला | भ | स्य | सु | र | क्ष | णा | र्थं |
| भ | वि | ष्य | ला | भ | स्य | च | स | ङ्ग | मा | र्थम् |
| आ | प | त्प्र | प | न्न | स्य | च | मो | क्ष | णा | र्थं |
| य | न्म | न्त्र्य | ते | ऽसौ | प | र | मो | हि | म | न्त्रः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.