अन्वयः
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यस्य भवने सुहृदः नित्यशः समागच्छन्ति तस्य चित्ते (उत्पन्नस्य) सौख्यस्य प्रतिमं सुखं किञ्चित् न (अस्ति) ।
Summary
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There is no happiness comparable to the joy in the heart of one whose home is regularly visited by friends.
सारांश
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जिसके घर पर नित्य मित्रों का आगमन होता है, उसके हृदय में उत्पन्न होने वाले सुख के समान संसार में अन्य कोई सुख नहीं है।
पदच्छेदः
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| सुहृदः | सुहृद् (१.३) | friends |
| भवने | भवन (७.१) | in the house |
| यस्य | यद् (६.१) | whose |
| समागच्छन्ति | समागच्छन्ति (सम्+आ√गम् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | come together |
| नित्यशः | नित्यशस् | always |
| चित्ते | चित्त (७.१) | in the mind/heart |
| च | च | and |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| सौख्यस्य | सौख्य (६.१) | of happiness |
| न | न | not |
| किञ्चित् | किञ्चित् (१.१) | anything |
| प्रतिमं | प्रतिम (१.१) | equal |
| सुखम् | सुख (१.१) | happiness |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | हृ | दो | भ | व | ने | य | स्य |
| स | मा | ग | च्छ | न्ति | नि | त्य | शः |
| चि | त्ते | च | त | स्य | सौ | ख्य | स्य |
| न | कि | ञ्चि | त्प्र | ति | मं | सु | खम् |
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