अन्वयः
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समर्थानां कः अतिभारः? व्यवसायिनां किं दूरम्? सुविद्यानां कः विदेशः? प्रिय-वादिनां कः परः?
Summary
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What is a heavy burden for the capable? What is distance for the industrious? What is a foreign land for the well-educated? And who is a stranger to those who speak kindly?
सारांश
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समर्थ लोगों के लिए कोई भार भारी नहीं है, व्यापारियों के लिए कोई स्थान दूर नहीं है, विद्वानों के लिए कोई विदेश नहीं है और मधुर बोलने वालों के लिए कोई पराया नहीं है।
पदच्छेदः
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| कः | किम् (१.१) | what |
| अतिभारः | अति–भार (१.१) | excessive burden |
| समर्थानाम् | समर्थ (६.३) | of the capable |
| किम् | किम् (१.१) | what |
| दूरम् | दूर (१.१) | far |
| व्यवसायिनाम् | व्यवसायिन् (६.३) | of the diligent |
| विदेशः | विदेश (१.१) | foreign land |
| सुविद्यानाम् | सु–विद्या (६.३) | of the learned |
| परः | पर (१.१) | stranger, enemy |
| प्रियवादिनाम् | प्रिय–वादिन् (६.३) | of those who speak kindly |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| को | ऽति | भा | रः | स | म | र्था | नां |
| किं | दू | रं | व्य | व | सा | यि | नाम् |
| को | वि | दे | शः | सु | वि | द्या | नां |
| कः | प | रः | प्रि | य | वा | दि | नाम् |
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