अन्वयः
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वित्ते यस्य चित्तं कदाचन विकारं न याति सर्व-काले च मित्रम् स्यात् उत्तमम् मित्रम् कारयेत् ।
Summary
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One should make him a best friend whose mind never undergoes a change due to wealth and who remains a friend at all times.
सारांश
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जिसका मन धन के आने पर भी विकृत नहीं होता और जो सदैव साथ बना रहता है, ऐसे श्रेष्ठ व्यक्ति को ही अपना मित्र बनाना चाहिए।
पदच्छेदः
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| विकारम् | विकार (२.१) | disturbance |
| याति | याति (√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | undergoes |
| नो | न | not |
| चित्तम् | चित्त (१.१) | mind |
| वित्ते | वित्त (७.१) | in wealth |
| यस्य | यद् (६.१) | whose |
| कदाचन | कदाचन | ever |
| मित्रम् | मित्र (१.१) | friend |
| स्यात्सर्व-काले | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.)–सर्व–काल (७.१) | should be at all times |
| च | च | and |
| कारयेन्मित्रमुत्तमम् | कारयेत् (√कृ +णिच् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.)–मित्र (२.१)–उत्तम (२.१) | should make an excellent friend |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | का | रं | या | ति | नो | चि | त्तं |
| वि | त्ते | य | स्य | क | दा | च | न |
| मि | त्रं | स्या | त्स | र्व | का | ले | च |
| का | र | ये | न्मि | त्र | मु | त्त | मम् |
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