अन्वयः
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मित्राणाम् पुनः प्रति-उपकाराय प्रियम् क्रियते । मित्र-मित्रस्य यत् कार्यम् मित्रैः पुनः किम् न कृतम् ?
Summary
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Acts of kindness are done for friends in expectation of reciprocation. However, friends have always performed every possible deed for a friend of a friend without such expectations.
सारांश
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मित्रों का प्रिय कार्य अक्सर प्रत्युपकार की अपेक्षा में किया जाता है, किंतु मित्र के मित्र के लिए भी मित्र जो सहायता करते हैं, वह सच्ची मित्रता का प्रतीक है।
पदच्छेदः
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| पुनः | पुनर् | again |
| प्रत्युपकाराय | प्रत्युपकार (४.१) | for a return favor |
| मित्राणां | मित्र (६.३) | of friends |
| क्रियते | क्रियते (√कृ भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is done |
| प्रियम् | प्रिय (१.१) | a favor |
| यत् | यद् (१.१) | that which |
| पुनर् | पुनर् | again |
| मित्र-मित्रस्य | मित्र–मित्र (६.१) | of a friend's friend |
| कार्यं | कार्य (१.१) | a task |
| मित्रैः | मित्र (३.३) | by friends |
| न | न | not |
| किं | किम् | what/why |
| कृतम् | कृत (√कृ+क्त, १.१) | done |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पु | नः | प्र | त्यु | प | का | रा | य |
| मि | त्रा | णां | क्रि | य | ते | प्रि | यम् |
| य | त्पु | न | र्मि | त्र | मि | त्र | स्य |
| का | र्यं | मि | त्रै | र्न | किं | कृ | तम् |
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