अन्वयः
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सु-प्रयुक्तस्य दम्भस्य अन्तम् ब्रह्मा अपि न गच्छति कौलिकः विष्णु-रूपेण राज-कन्याम् निषेवते ।
Summary
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Even Brahmā cannot find the end of well-practiced deceit. A weaver, by assuming the form of Viṣṇu, is able to enjoy the company of a princess.
सारांश
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कुशलता से किए गए पाखंड का अंत ब्रह्मा भी नहीं जान सकते। जैसे एक जुलाहे ने विष्णु का रूप धारण कर राजकन्या के साथ सुख भोगा था।
पदच्छेदः
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| सुप्रयुक्तस्य | प्रयुक्त (सु+प्र√युज्+क्त, ६.१) | well-applied |
| दम्भस्य | दम्भ (६.१) | of deceit |
| ब्रह्मा | ब्रह्मन् (१.१) | Brahma |
| अपि | अपि | even |
| अन्तम् | अन्त (२.१) | the end |
| न | न | not |
| गच्छति | गच्छति (√गम् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | reaches |
| कौलिकः | कौलिक (१.१) | a weaver |
| विष्णुरूपेण | विष्णु–रूप (३.१) | in the form of Vishnu |
| राजकन्याम् | राजन्–कन्या (२.१) | a king's daughter |
| निषेवते | निषेवते (नि√सेव् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | serves/enjoys |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | प्र | यु | क्त | स्य | द | म्भ | स्य |
| ब्र | ह्मा | प्य | न्तं | न | ग | च्छ | ति |
| कौ | लि | को | वि | ष्णु | रू | पे | ण |
| रा | ज | क | न्यां | नि | षे | व | ते |
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