अन्वयः
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सततम् पर-पुरुष-संसक्ता कुलटा कुल-पतनम् जन-गर्हाम् बन्धनम् अपि जीवितव्य-सन्देहम् अङ्गी-करोति ।
Summary
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An unchaste woman, constantly attached to other men, accepts the fall of her family, public reproach, imprisonment, and even the risk to her own life.
सारांश
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दूसरे पुरुष में आसक्त स्त्री कुल का नाश, लोक-निंदा और प्राणों के संकट को भी हंसते-हंसते स्वीकार कर लेती है।
पदच्छेदः
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| कुल-पतनं | कुल–पतन (२.१) | disgrace of family |
| जन-गर्हां | जन–गर्हा (२.१) | public censure |
| बन्धनम् | बन्धन (२.१) | imprisonment |
| अपि | अपि | even |
| जीवितव्य-सन्देहम् | जीवितव्य–सन्देह (२.१) | risk to life |
| अङ्गीकरोति | अङ्गीकरोति (अङ्गी√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | accepts |
| कुलटा | कुलटा (१.१) | an unchaste woman |
| सततं | सतत | constantly |
| पर-पुरुष-संसक्ता | पर–पुरुष–संसक्त (१.१) | attached to another man |
छन्दः
आर्या []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कु | ल | प | त | नं | ज | न | ग | र्हां | |||
| ब | न्ध | न | म | पि | जी | वि | त | व्य | स | न्दे | हम् |
| अ | ङ्गी | क | रो | ति | कु | ल | टा | ||||
| स | त | तं | प | र | पु | रु | ष | सं | स | क्ता |
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