अन्वयः
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सायम् सूर्य-ऊढे गृह-मेधिनाम् यः अतिथिः सम्प्राप्तः, तस्य पूजया गृह-मेधिनः देवत्वम् प्रयान्ति ।
Summary
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When a guest arrives at the home of householders in the evening at sunset, the householders attain divinity through his worship.
सारांश
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सूर्यास्त के समय घर आए अतिथि का सत्कार करके गृहस्थ देवत्व को प्राप्त करते हैं।
पदच्छेदः
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| सम्प्राप्तः | सम्प्राप्त (सम्√प्राप्+क्त, १.१) | arrived |
| यः | यद् (१.१) | who |
| अतिथिः | अतिथि (१.१) | a guest |
| सायम् | सायम् | in the evening |
| सूर्योढे | सूर्य–ऊढ (७.१) | when the sun has set |
| गृह-मेधिनाम् | गृह–मेधिन् (६.३) | of householders |
| पूजया | पूजा (३.१) | by worship |
| तस्य | तद् (६.१) | of him |
| देवत्वम् | देवत्व (२.१) | divinity |
| प्रयान्ति | प्रयान्ति (प्र√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | attain |
| गृह-मेधिनः | गृह–मेधिन् (१.३) | householders |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | म्प्रा | प्तो | यो | ऽति | थिः | सा | यं |
| सू | र्यो | ढे | गृ | ह | मे | धि | नाम् |
| पू | ज | या | त | स्य | दे | व | त्वं |
| प्र | या | न्ति | गृ | ह | मे | धि | नः |
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