अन्वयः
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भाण्ड-क्रय-विचक्षणाः लोकाः दूर-देश-अन्तरम् गताः उद्यमात् द्वि-गुणम् त्रि-गुणम् वित्तम् प्राप्नुवन्ति ।
Summary
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People skilled in the trade of goods, by traveling to distant lands, obtain double or triple wealth through their industrious efforts.
सारांश
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व्यापार में कुशल लोग उद्यम करके और दूर देशों की यात्राएँ करके अपने धन को दो-गुना या तीन-गुना बढ़ा लेते हैं।
पदच्छेदः
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| द्विगुणम् | द्विगुण (२.१) | double |
| त्रिगुणम् | त्रिगुण (२.१) | triple |
| वित्तम् | वित्त (२.१) | wealth |
| भाण्ड-क्रय-विचक्षणाः | भाण्ड–क्रय–विचक्षण (१.३) | skilled in buying and selling goods |
| प्राप्नुवन्ति | प्राप्नुवन्ति (प्र√आप् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | obtain |
| उद्यमात् | उद्यम (५.१) | from effort |
| लोकाः | लोक (१.३) | people |
| दूर-देशान्तरम् | दूर–देशान्तर (२.१) | to other distant lands |
| गताः | गत (√गम्+क्त, १.३) | gone |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द्वि | गु | णं | त्रि | गु | णं | वि | त्तं |
| भा | ण्ड | क्र | य | वि | च | क्ष | णाः |
| प्रा | प्नु | व | न्त्यु | द्य | मा | ल्लो | का |
| दू | र | दे | शा | न्त | रं | ग | ताः |
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