प्रत्यासन्नसखीवितीर्णमुकुलद्वीटीदलग्राहिणा
सव्येनादधती करेण मृदुना दर्वीं मणीनिर्मिताम् ।
कुर्वाणा करपल्लवे तदितरे कुम्भं सुधापूरितं
चिद्रूपा परमा कला पुरभिदश्चित्ते ममास्ते तु सा ॥
प्रत्यासन्नसखीवितीर्णमुकुलद्वीटीदलग्राहिणा
सव्येनादधती करेण मृदुना दर्वीं मणीनिर्मिताम् ।
कुर्वाणा करपल्लवे तदितरे कुम्भं सुधापूरितं
चिद्रूपा परमा कला पुरभिदश्चित्ते ममास्ते तु सा ॥
सव्येनादधती करेण मृदुना दर्वीं मणीनिर्मिताम् ।
कुर्वाणा करपल्लवे तदितरे कुम्भं सुधापूरितं
चिद्रूपा परमा कला पुरभिदश्चित्ते ममास्ते तु सा ॥
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | त्या | स | न्न | स | खी | वि | ती | र्ण | मु | कु | ल | द्वी | टी | द | ल | ग्रा | हि | णा |
| स | व्ये | ना | द | ध | ती | क | रे | ण | मृ | दु | ना | द | र्वीं | म | णी | नि | र्मि | ताम् |
| कु | र्वा | णा | क | र | प | ल्ल | वे | त | दि | त | रे | कु | म्भं | सु | धा | पू | रि | तं |
| चि | द्रू | पा | प | र | मा | क | ला | पु | र | भि | द | श्चि | त्ते | म | मा | स्ते | तु | सा |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.