त्वं नो राज्यं त्वं बलं त्वं धनानि
त्वं नः प्राणास्त्वं भवस्यन्तरात्मा ।
त्वद्दासाःस्मस्त्वत्कटाक्षप्रतीक्षा
स्त्वं यद्भूयास्तत्प्रमाणं परं नः ॥
त्वं नो राज्यं त्वं बलं त्वं धनानि
त्वं नः प्राणास्त्वं भवस्यन्तरात्मा ।
त्वद्दासाःस्मस्त्वत्कटाक्षप्रतीक्षा
स्त्वं यद्भूयास्तत्प्रमाणं परं नः ॥
त्वं नः प्राणास्त्वं भवस्यन्तरात्मा ।
त्वद्दासाःस्मस्त्वत्कटाक्षप्रतीक्षा
स्त्वं यद्भूयास्तत्प्रमाणं परं नः ॥
छन्दः
शालिनी [११: मततगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्वं | नो | रा | ज्यं | त्वं | ब | लं | त्वं | ध | ना | नि |
| त्वं | नः | प्रा | णा | स्त्वं | भ | व | स्य | न्त | रा | त्मा |
| त्व | द्दा | साः | स्म | स्त्व | त्क | टा | क्ष | प्र | ती | क्षा |
| स्त्वं | य | द्भू | या | स्त | त्प्र | मा | णं | प | रं | नः |
| म | त | त | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.